हल्द्वानी। एक समय था जब बैंक में लोग पैसा जमा करते थे, ताकि पैसा सुरक्षित भी रहे और जमा पैसे पर बैंक से ब्याज भी मिले। हांलाकि अब उल्टा हो रहा है। बैंक अब अपने ही ग्राहकों की जेब काटने पर आमादा हैं। ये शातिर बैंक ऐसे-ऐसे तरीकों से पैसे काट रहे हैं, जिसकी भनक तक खाताधारक को नही लगती।
दरअसल, बैंकों ने घाटे की भरपाई के लिए ग्राहकों पर ऐसे-एसे शुल्क लगा दिए हैं, जिन्हें पहली कभी नहीं लिया गया। फोलियो चार्ज के नाम पर बैंकों को मोटी कमाई होती है। 25-30 साल पहले ग्राहकों के लेनदेन का ब्योरा बैंक रजिस्टर में दर्ज करते थे, जिसे फोलियो कहा जाता था। उस दौर में जब हाथ से फोलियो पर एक-एक राशि चढ़ाई जाती थी, तब बैंक इसका कोई शुल्क ग्राहकों से नहीं लेते थे, लेकिन अब ऐसा नही है। आज डिजिटल दौर में सॉफ्टवेयर ऑटोमेटिक फोलियो बनाता है, तब बैंक ग्राहकों से फोलियो चार्ज वसूल रहे हैं। फिर चाहे रिजेक्ट भी हो जाए तो भी बैंक को प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर कुछ राशि काट लेते हैं। लेजर फोलियो चार्ज: 200 रुपये प्रति पेज (किसी भी तरह के लोन पर सीसी या ओडी पर वसूला जाता है।) चेकबुक चार्ज: 3 से 5 रुपये प्रति लीफ (दूसरी चेकबुक पर)। किसी भी कारण से चेक वापसी हो गई तो 225 रुपये कटेंगे।

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