डीडीसी, दिल्ली। इंसानी शरीर में दिमाग के दो हिस्से होते है और दिमाग के दोनों हिस्सों की सोच भी एक दूसरे से अलग है। है ना चैंकाने वाली खबर कि दिमाग तो एक है लेकिन सोचते अलग-अलग।
लेफ्ट ब्रेन vs राइट ब्रेन थ्योरी कितनी सही है? विशेषज्ञ कह रहे हैं कि यह एकतरफा बात नहीं है बल्कि क्रिएटिविटी एक कॉम्प्लेक्स स्टडी है।दिमाग को बायोलॉजिकली दो गोलार्धों में समझा जाता है, यानी आधा दाईं तरफ का और आधा बाईं तरफ का। माना जाता रहा कि क्रिएटिविटी का ताल्लुक दिमाग के दाएं गोलार्ध से है। इनोवेटिव लोगों को ‘राइट ब्रेन थिंकर कहा जाता है और जो लोग तर्क या विश्लेषण बुद्धि रखते हैं, उन्हें ‘लेफ्ट ब्रेन थिंकर’, लेकिन विशेषज्ञों के एक वर्ग ने हमेशा माना है कि यह प्रक्रिया इतनी सरल नहीं है। इसी साल ब्रेन इमेजिंग पर एक नई स्टडी ने इस विषय में दिलचस्प प्रयोगों से एक नई रोशनी डाली है। न्यूरोइमेज नाम के जर्नल में छपी इस स्टडी में एक्सपेरिमेंट से पता चले निष्कर्ष में कहा गया कि इंप्रोवाइज़ेशन में कम अनुभव रखने वाले संगीतकारों में क्रिएटिविटी शुरूआती तौर पर दाएं दिमाग से संचालित पाई गई, लेकिन जो संगीतकार इंप्रोवाइज़ेशन में महारत रखते हैं, उनके लेफ्ट दिमाग से क्रिएटिविटी का ताल्लुक दिखा। इसका सार समझा गया कि जो लोग अपने क्षेत्र में शुरूआती दौर में हैं, उनमें राइट ब्रेन क्रिएटिविटी और जो अपने क्षेत्र में ज़्यादा अनुभवी, जानकार या कुशल हैं, वो लेफ्ट ब्रेन क्रिएटिव हैं।

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