हल्द्वानी। हाई स्पीड डाटा के दौर में बीएसएनएल 3G की सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। जबकि इसके उलट प्राइवेट टेलीकॉम कम्पनियां अपने ग्राहकों को 5G स्पीड से दौड़ाने वाली हैं। इन हालातों के बीच आर्थिकी और ग्राहकों के लिए जूझ रहे कंपनी के बीएसएनएल कर्मचारी संघ ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है और वो भी बिना ग्राहकों को कष्ट दिए।
संघ ने केंद्र से अपने वादे को निभाने और 4 जी सेवाओं को रोल करने में मदद करने का अनुरोध किया है ताकि दूरसंचार कंपनी निजी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके। सरकार ने अपने पुनरुद्धार पैकेज की घोषणा की है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है, बीएसएनएलईयू कर्नाटक के अध्यक्ष सीके गुंडन्ना ने रविवार को बताया की हमारे कर्मचारी की ताकत को आधा कर दिया गया है। बीएसएनएल ने जुलाई में 3.88 लाख ग्राहक जोड़े। जबकि वोडाफोन-आइडिया ने 37.26 लाख ग्राहक खो दिए। ग्राहकों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जियो और एयरटेल के लिए चला गया। केंद्र द्वारा बीएसएनएल को 4 जी सेवाओं को रोल आउट करने की अनुमति देने के लिए पर्याप्त कारण है। जबकि निजी दूरसंचार कंपनियां 5 जी लॉन्च करने के लिए तैयार हैं, हमें अभी भी 4 जी से वंचित किया जा रहा है। आपको बता दें कि बीएसएनएल में 70 प्रतिशत से अधिक अनुबंध कर्मचारियों को उनके वेतन बकाया को हटाए बिना हटा दिया गया है।

देश में आधी हुई कर्मचारियों की संख्या

दिसंबर 2019 में, हमारे पास देश भर में 1.6 लाख कर्मचारी थे। अब यह मुश्किल से 66,000 है। केंद्र रिलायंस जियो की मदद करने के लिए बीएसएनएल को मारने की कोशिश कर रहा है। जिसने इसके लॉन्च के बाद से बहुत लाभ उठाया है, लेकिन उन्हें एहसास दिलाएं कि 4 जी सेवाओं की कमी के बावजूद हमें नए ग्राहक मिल रहे हैं।

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