– योगी सरकार के हलफनामे पर हाईकोर्ट ने आड़े हाथों लिया

भरत गुप्ता, डीडीसी। आप बताइए कि क्या 100 रुपये में आप 3 टाइम भोजन कर सकते है और वो भी इतना पौष्टिक की रोगी को रोग से लड़ने में सहायक हो। हमें पता है कि आपका जवाब होगा ना, लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ये कारनामा कोरोना मरीजो के साथ कर रही है और इस कारनामे पर आज योगी सरकार को भरी अदालत शर्मिंदा होना पड़ा। क्योंकि प्रयागराज हाईकोर्ट को भी योगी सरकार का ये कारनामा हजम नही हुआ। ऐसे कई सारे कारनामे थे, जिसने कोरोना काल मे सरकार की कारगुजारियों की पोल खोल डाली। इतना ही नही सरकार ने संक्रमण दर कम करने के लिए राज्य में टेस्टिंग तक कम कर दी। आइए जानते हैं कि सरकार ने और क्या-क्या कहा अपने हलफनामे में।

ऑक्सीजन उत्पादन की जानकारी नही दी, एम्बुलेंस भी कम
कोर्ट ने पिछले निर्देशों के पालन में अपर सॉलिसिटर जनरल द्वारा प्रस्तुत हलफनामे को असंतोषजनक करार देते हुए कहा कि कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अस्पतालों द्वारा मेडिकल बुलेटिन जारी करने, ऑक्सीजन व जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता से संबं‌धित जान‌कारियां हलफनामे में नहीं दी गई हैं। कोर्ट ने कोविड मरीजों को अस्पतालों में उपलब्ध कराए जा रहे पौष्टिक आहार और कोर्ट ने कोरोना से हुई मौतों का तारीखवार ब्योरा उपलब्ध न कराने पर भी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि सरकार के हलफनामें में जो आंकड़े दिए गए हैं, वे आश्चर्यजनक रूप से यह बताते हैं कि परीक्षण की संख्या धीरे-धीरे कम हो गई है। 22 अस्पतालों में ऑक्सीजन उत्पादन के बारे में भी जानकारी नहीं दी गई। राज्य में जिलों की संख्या को देखते हुए एम्बुलेंस भी बहुत कम हैं।

कोरोना मरीज को सौ रुपये तीन बार कैसे मिल रहा है भोजन
कोर्ट ने कहा, लेवल -1, लेवल -2 और लेवल -3 श्रेणी के अस्पतालों को दिए जाने वाले भोजन के बारे में कोई विवरण नहीं दिया गया है। केवल यह बताया गया है कि लेवल -1 अस्पताल में प्रति रोगी 100 रुपये का आवंटन किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि कोविड रोगी को अत्यधिक पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है, जिसमें फल व दूध शामिल करना चाहिए और न्यायालय यह समझ नहीं पा रहा है कि कैसे प्रति व्यक्ति बजट में 100 रुपये के साथ सरकार लेवल -1 श्रेणी में तीन बार भोजन का प्रबंध कर रही है वह भी 2100 आवश्यक कैलोरी के साथ। लेवल -2 और लेवल -3 अस्पतालों के बारे में कोई विवरण नहीं दिया गया है। कोर्ट ने सभी श्रेणी के अस्पतालों के संबंध में प्रत्येक आइटम की कैलोरी गणना के साथ भोजन विवरण पेश करने को कहा है।

विनाशकारी परिणामों की थाह लेने सब नाकाम रहे
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को यह दिप्‍पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि इस अदूरदर्शिता की वजह से उत्‍तर प्रदेश में कोविड-19 संक्रमण के मामलों में उछाल देखा जा रहा रहा है। जबकि कोरोना की पहली लहर के दौरान यह वायरस ग्रामीण आबादी तक नहीं पहुंचा था। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ ने पंचायत चुनाव में जान गंवाने वाले मतदान अधिकारियों के परिवार की मुआवजा राशि पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान वकीलों ने कहा कि सरकार को चुनाव ड्यूटी के दौरान संक्रमण के खतरे की जानकारी की थी। किसी ने स्वेच्छा से चुनाव ड्यूटी नहीं की बल्कि शिक्षकों, अनुदेशकों और शिक्षामित्रों से जबरदस्ती चुनाव ड्यूटी कराई गई। इसलिए सरकार को कोराना से मरने वाले मतदान अधिकारियों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देना चाहिए। कोर्ट ने सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को मुआवजे की राशि पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है।

जो नहीं करा सकते रजिस्ट्रेशन उनके लिए क्या है व्यवस्था
दिव्यांगों को वैक्सीन लगाने के सम्बंध में किए गए आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार का कहना था कि वह केंद्र सरकार की गाइड लाइन का ही पालन कर रही है। केंद्र की गाइड लाइन में इस बारे में कोई निर्देश नहीं दिया गया है। इसी प्रकार 45 से कम आयु के लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए पंजीकरण अनिवार्य करने के मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि अशिक्षित लोगों और मजदूर जो स्वयं अपना ऑन लाइन रिजस्ट्रेशन करने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें वैक्सीन लगाने के लिए क्या योजना है। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि दिव्यांगों को वैक्सीन लगाने के लिए खुद की नीति बनाने में उसे ‌क्या परेशानी आ रही है। कोर्ट ने कहा कि हमारी आबादी की एक बड़ी संख्या अब भी गांवों में रहती है। कई ऐसे लोग हैं जो केवल 18 और 45 वर्ष की आयु के बीच के मजदूर हैं और वे टीकाकरण के लिए ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कर सकते हैं।

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