– सावन में दर्द से कराहते मिले सांड ‘डमरू’ के साथ अब निकिता के रेस्क्यू सेंटर में होता है बेजुबानों का इलाज

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। नाम है डमरू और ये डमरू सांड अब निकिता की जान है। सावन में दर्द से कराहते मिले डमरू को पशु चिकित्सकों ने जवाब दे दिया था, लेकिन निकिता की लगन से डमरू को नया जीवन मिल गया। अब आलम यह है कि निकिता दर्द से कराहते हर बेजुबान की दोस्त बन चुकी हैं। निकिता के इस नेक काम में अब आदि श्री धाम ट्रस्ट के दीपक जोशी, गितांशु, तरुण जोशी, मंजू भट्ट भी मददगार हैं।

डमरू को नया जीवन मिलने के बाद निकिता सुयाल ने पंचायत घर में अपने घर के बाहर पूरा रेस्क्यू सेंटर तैयार कर दिया है। जिसमें उनके पति नीरज सुयाल और बच्चे अक्षिता व अक्षत को भी बेजुबानों की सेवा में मजा आने लगा है। एक गाय जिसका गला सड़ चुका था और चिकितस्कों ने इसे भी जवाब दे दिया था। आज ये जिंदा है और स्वस्थ भी। इन दिनों एक बछड़े की टूटी टांग को जोड़ने की कवायद चल रही है।

नीलू दा ने भी जी जान लगा दी है
बछड़े की टूटी टांग को जोड़ने के लिए नीलांबर दत्त कांडपाल रोज रेस्क्यू सेंटर पहुंचते हैं। जबकि पंतनगर पशु चिकित्सालय में सर्जरी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. मंजुल कांडपाल व एलईओ विनीत का रेस्क्यू सेंटर को दिशा-निर्देशन मिल रहा है। अभी तक दो दर्जन से ज्यादा घायल जानवरों को यहां ठीक किया जा चुका है और करीब एक दर्जन का इलाज चल रहा है। एक बछड़ा तो ऐसा है, जिसकी कई हड्डियों के साथ गर्दन भी टूटी है। अब ये बछड़ा धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा है। निकिता के साथ आदि श्री धाम ट्रस्ट की बड़ी टीम जुड़ चुकी है, जो घायल जानवरों का रेस्क्यू कर यहां पहुंचाते हैं।

टीम में एक हिप्नोटाइजर भी है
निकिता ने बताया कि उनकी टीम में एक हिप्नोटाइडर है, जिनका नाम मंजू भट्ट है। मंजू को हिप्नोटाइजर निकिता प्यार से बोलती हैं, लेकिन इसके पीछे एक वजह है। दरअसल, मंजू की जानवरों से दोस्ती बहुत जल्द हो जाती है और ये जानवरों का रेस्क्यू करने में बहुत काम आता है।

आप भी कर सकते हैं बेजुबानों की मदद
छोड़े गए और घायल जानवरों की आप भी मदद कर सकते हैं। मदद सिर्फ पैसों से नहीं बल्कि आप इनके लिए रेस्क्यू सेंटर को बतौर दान भूसा, पराली, नमक, पशुआहार, गुड़, तिरपाल और दवाओं से मदद कर सकते हैं। बता दें इन जानवरों पर हर माह केवल दवाओं का 15 हजार से ज्यादा खर्च होता है।

सरकार से भी मदद की गुहार
आदि श्री धाम में को-फाउंडर निकिता के लिए आने वाला समय मुश्किल हो सकता है और इसकी वजह है रेस्क्यू सेंटर में घायल जानवरों की बढ़ती संख्या। इसको देखते हुए उन्होंने राज्य सरकार से भी मदद की अपील की है। ताकि घायल जानवरों को नया जीवन देने का सिलसिला चलता रहे।

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