– नेता के बेटे ने बहन से की छेड़छाड़, भाभी का हुआ गर्भपात और चुप रही पुलिस

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। ये बात कॉलेज के दिनों की है। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जेल में हुई गैंगवार का मुख्य सूत्रधार अंशु दीक्षित भी एक साधारण परिवार का लड़का था और उसकी बहन पर थी एक नेता के बेटे की गंदी नजर। विरोध किया तो नेता के बेटे ने अंशु को गोली मार दी। घायल अंशु न्याय के लिए पुलिस के पास पहुंचा, लेकिन खादी और खाकी के याराने में का अंशु का परिवार पिस गया। सदमे में उसकी भाभी का गर्भपात हो गया और फिर बदले की आग ने अंशु को जुर्म के दलदल में धकेल दिया। आइए, जानते हैं खाकी, खादी के याराने और एक शॉर्प शूटर बदमाश अंशु की अनकही दिलचस्प कहानी।

अंशु ने मारे बदमाश और पुलिस ने अंशु को
14 मई 2021 को उत्तर प्रदेश की चित्रकूट जेल में हुई फायरिंग में तीन बदमाश मारे गए हैं। इनमें से एक अंशु दीक्षित है। अंशु दीक्षित ने ही दूसरे गुट के दो बदमाशों, मुकीम काला और मेराज पर फायरिंग कर जान से मार डाला। खबर पर पुलिस ने मोर्चा संभाला और फिर अंशु की पुलिस से भी मुठभेड़ हो गई, जिसमें पुलिस ने अंशु को मार गिराया। इस गैंगवार में प्रतिबंधित बोर 9 एमएम बोर का इस्तेमाल किया गया। अब इस पूरे मामले में जेल पुलिस कटघरे में है कि जब कोरोना काल में बंदी और कैदियों से मुलाकातें बंद है तो जेल में प्रतिबंधित 9 एमएम बोर का असलहा कैसे पहुंचा।

2014 में गिरफ्तार किया था एसटीएफ ने
04 दिसंबर 2014 की सर्द रात को गोरखपुर की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक मुठभेड़ में 15 हजार के इनामी खतरनाक शार्प शूटर अंशु दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया था। अंशु के पास से एक 9 एमएम पिस्टल, कट्टा, कारतूस, मोबाइल व फर्जी पहचान पत्र बरामद हुए थे। अंशु पर भोपाल रेंज के डीआइजी ने 10 हजार व डीआइजी जीआरपी लखनऊ ने 5 हजार का इनाम घोषित कर रखा था। पुलिस की गिरफ्त में आया अंशु ने अब तक कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका था। अंशु की घेराबंदी करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स के एडिशनल एसपी एस आनंद और तत्कालीन एडिशनल एसपी डॉ अरविंद चतुर्वेदी ने जबरदस्त प्लानिंग की इस काम को अंजाम देने के लिए डिप्टी एसपी विकास त्रिपाठी को लगाया गया था। यूपी एसटीएफ के उपाधीक्षक विकास त्रिपाठी के नेतृत्व में टीम को इस शार्प शूटर के गोरखनाथ थाना क्षेत्र में होने की सूचना मिली थी। सूचना पर एसटीएफ की टीम सक्रिय हुई थी और कुछ देर बाद ही इनका आमना-सामना हो गया। भागने के लिए अंशु ने फायर किया, लेकिन पकड़ा गया।

सीतापुर से शुरू हुआ आपराधिक सफर
अंशु का आपराधिक सफर सीतापुर जिले के मानकपुर से शुरू हुआ। कुड़रा बनी निवासी अंशु दीक्षित लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के बाद अपराधियों के संपर्क में आया। कई वारदातों को अंजाम देकर उसने अपना खौफ कायम किया। एसटीएफ की मानें तो अंशु ने सुधाकर पांडेय, जय सिंह, संतोष सिंह व विक्रांत मिश्र के साथ मिलकर कई हत्याएं की हैं।

STF के दरोगा को एक और क्राइम ब्रांच के सिपाही को मारी 2 गोली
2008 में वह गोपालगंज (बिहार) के भोरे में अवैध असलहों के साथ पकड़ा गया था। 17 अक्टूबर 2013 को पेशी से लौटते समय वह सीतापुर रेलवे स्टेशन पर सिपाहियों को जहरीला पदार्थ खिलाकर फायर करते हुए फरार हो गया। 27 सितंबर 2014 को अंशु की भोपाल में मौजूदगी की सूचना पर एसटीएफ लखनऊ के दारोगा संदीप मिश्र उसे गिरफ्तार करने गये थे। संदीप मिश्र ने भोपाल क्राइम ब्रांच की टीम के साथ उसे पकड़ने के लिए घेराबंदी की, लेकिन शार्प शूटर फायरिंग कर भाग निकला था। इस गोलीबारी में दारोगा संदीप मिश्र को दो तथा क्राइम ब्रांच भोपाल के सिपाही राघवेंद्र को एक गोली लगी थी। पेशेवर शूटर का लखनऊ में गोरखपुर के तत्कालीन सभासद फौजी व सीएमओ हत्याकांड में भी नाम आया था।

अंशु ने सुनाई पुलिस को अपनी कहानी
कस्टडी में अंशु ने पुलिस को बताया कि एक राजनैतिक पार्टी के नेता का बेटा उसकी बहन से छेड़छाड़ करता था। ऐसी हरकत से मना करने पर उस नेता के बेटे ने गुंडई की। सरेआम पिटाई करने के बाद अंशु पर गोली दाग दी। नेता के बेटे के द्वारा किए गए हमले में अंशु के पैर में गोली लगी। जब वो शिकायत लेकर थाने गया तो एसओ ने कार्रवाई करने से मना कर दिया। इस दौरान उसके पूरे परिवार का उत्पीड़न किया गया। इस उत्पीड़न की वजह से उसकी भाभी को काफी तकलीफ उठानी पड़ी और भाभी का गर्भपात ही गया। उसके बाद से अंशु ने ठान लिया कि वह अब बदला लेकर ही रहेगा। अंशु को फैजाबाद के एक नेता का वरदहस्त मिला, इसलिए वह आराम से अपने काम को अंजाम देता गया।

--Advertisement--

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here