पटना, डीडीसी। वर्ष 2020 के विहार विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण बदल चुके है। मुस्लिम और यादव वोटर के सहारे सरकार बनाने का दंभ भरने वालों को अब कुछ और नया सोचना होगा। इसकी वजह है इस दफा आए चुनाव के नतीजे। जहां हर बार यादव और मुस्लिम उम्मीदवार बड़ी संख्या जीतते थे, वहीं इस दफा नजारा बदला-बदला है। अब बिहार में हर चौथा विधायक सवर्ण है और यादव और मुस्लिम उम्मीदवारों के हार की संख्या बढ़ी है। राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से करीब 64 विधायक अगड़ी जातियों से चुनकर आए हैं। एनडीए ने बीजेपी, जेडीयू, वीआईपी और HAM के साथ मिलकर अगड़ी और पिछड़ी जातियों का बैलेंस बनाया। यह फॉर्मूला सबसे ज्यादा बीजेपी के कोर वोट बैंक माने जाने वाले सवर्ण समुदाय के लिए सियासी तौर पर फायदेमंद रहा है।
बिहार में कुल 28 राजपूत विधायक जीतकर आए हैं, जबकि 2015 में 20 विधायक जीते थे। बीजेपी ने इस बार 21 राजपूतों को टिकट दिया था, जिनमें से 15 जीते हैं। जेडीयू के 7 राजूपत प्रत्याशियों में से महज 2 ही जीत सके और दो वीआईपी के टिकट पर जीते हैं। जबकि तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने 18 राजपूतों को टिकट दिया था, जिनमें महज 8 ही जीते। आरजेडी ने इस बार 8 टिकट दिए, जिनमें सात जीते। कांग्रेस के 10 में से एक को जीत मिली। एक निर्दलीय राजपूत विधायक भी जीता। पिछले चुनाव में बीजेपी से 9, आरजेडी से 2, जेडीयू से 6 और कांग्रेस से तीन राजपूत विधायक चुने गए थे। इस दफा 21 भूमिहार विधायक चुनकर आए हैं। जबकि 2015 में 17 विधायक चुने गए थे। इस दफा सबसे ज्यादा बीजेपी से 8 जीते, जेडीयू से 5, HAM से एक और महागठबंधन के 6 भूमिहार विधायक चुने गए हैं। जिनमें कांग्रेस से 4, आरजेडी और सीपीआई से 1-1 विधायक ने जीते। 2015 में बीजेपी से 9, जेडीयू से 4 और कांग्रेस से 3 भूमिहार विधायक चुने गए थे। बिहार में मुस्लिम विधायकों की संख्या घटकर दस साल पीछे चली गई है। इस बार के चुनाव में 19 मुस्लिम विधायक जीते हैं। जबकि 2015 में 24 मुस्लिम विधायक चुने गए थे। आरजेडी के टिकट पर सबसे ज्यादा 8 मुस्लिम जीते हैं। जबकि दूसरे नंबर 5 मुस्लिम विधायक इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन से चुने गए हैं। इसके अलावा कांग्रेस के चार, सीपीआई (माले) से एक और एक बसपा के टिकट पर जीत हासिल की है जबकि जेडीयू से एक भी मुस्लिम नहीं जीत सका। वर्ष 2015 के चुनाव में आरजेडी से 11, कांग्रेस से 7, जेडीयू से 5 और सीपीआई (माले) से एक मुस्लिम विधायक चुना गया था।

ब्राह्मण बढ़े, क्यों घट गई यादव
बिहार में इस बार 12 ब्राह्मण विधायक चुनाव जीते हैं। बीजेपी के 5 प्रत्याशी जीते है। जबकि जेडीयू के दोनों ब्राह्मण प्रत्याशी जीते। कांग्रेस से 3, आरजेडी से 2 को जीत मिली। जबकि 2015 में 11 विधायकों ने जीत हासिल की थी। इसमें 3 बीजेपी, 1 आरजेडी, 2 जेडीयू और 4 कांग्रेस से थे। इसके इतर यादव विधायको की संख्या घटी है और ये घटकर फिर 2010 के आंकड़े पर पहुंच गई है। इस बार चुनाव में विभिन्य दलों से कुल 52 यादव विधायक चुने गए हैं। जबकि 2015 में 61 विधायक जीते थे। इस बार आरजेडी से 36, सीपीआई (माले) से दो, कांग्रेस से एक और सीपीएम से एक यादव विधायक चुने गए हैं। वहीं बीजेपी से 6, जेडीयू से पांच और वीआईपी से एक यादव विधायक जीता है।

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