– वैक्सीन लगाने के बाद अपने आप मे ऐसा पहला मामला

डीडीसी, बदायूं। प्रामाणिक तो नही है, लेकिन ये बात 16 आना सत्य है कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बदायूं (Badaun) में कोरोना वैक्सीन लगाने के बाद एक लेखपाल अंधा हो गया। हद तो तब हुई जब लेखपाल की बीवी फरियाद लेकर जिलाधिकारी के पास पहुंची और जिलाधिकारी महोदया ने कह दिया कि सब नाटक है। जिसके बाद लेखपाल की बीवी का पारा सातवें आसमान पहुंच गया और वो धरने पर बैठ गई। बात बढ़ी तो आनन-फानन में लेखपाल की शिकायत शासन को भेजी गई।

वैक्सीन लगाई और आंख से निकलने लगा मवाद
ऐश्वर्या शर्मा बिसौली में लेखपाल हैं और 12 फरवरी को उन्होंने कोरोना की वैक्सीन लगवाई थी। इनके बाद उनकी तबियत बिगड़ गई। उन्हें पहले जिला अस्पताल और बरेली ले जाया गया। तबियय बिगड़ने के साथ ही लेखपाल की आंखों से मवाद आने लगा था। बरेली में बात नही बनी तो उन्हें अलीगढ़ मेडिकल कालेज ले जाया गया और फिर आखिर में दिल्ली एम्स रेफर कर दिया गया। उनकी पुतली बदली गई, लेकिन आंख नही बच सकी।

मेडिकल रिपोर्ट का इशारा भी वैक्सीन की ओर
पुतली बदलने के बाद भी जब आंखों की रोशनी नही बची तो सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हुआ कि आखिर ऐसा क्या हुआ था जो लेखपाल के आंखों मि रोशनी चली गई। जब इसकी वजह साफ नही हो सकी तो यही माना गया कि हो सकता है कि वैक्सीन की वजह से ही आंखों की रोशनी गई हो और लेखपाल की मेडिकल रिपोर्ट में भी ऐसा ही लिखा है।

पहले SDM फिर DM से शिकायत
इस मामले में लेखपाल ऐश्वर्या की पत्नी प्रतिभा ने पहले बिसौली एसडीएम महिपाल सिंह से मुलाकात की। एसडीएम ने डीएम दीपा रंजन के पास जाने को कहा। शनिवार दस बजे प्रतिभा अपने लेखपाल पति के साथ डीएम कार्यालय जा पहुंचा। आरोप है कि डीएम ने शिकायत सुनने और पति की हालत देखने बाद सब नाटक करार दे दिया। जिससे नाराज हो पति-पत्नी डीएम दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए। हल्ला हुआ तो डीएम ने कहा कि शासन को पत्र लिख दिया गया है। अपनी तरह का यह पहला मामला है, इसलिए शासन से जो आदेश आएगा वैसा ही होगा।

लेखपाल की मौत की जिम्मेदार होंगी डीएम
डीएम के जवाब से नाराज लेखपाल की पत्नी कलेक्ट्रेट में ही हड़ताल पर बैठ गईं। कहा, डीएम समस्या को नाटक कह रही हैं। जबकि मेरा व मेरे पति का जीवन उजड़ गया। पति की हालत भी ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, अगर लेखपाल की मौत होती है तो इसकी जिम्मेदार डीएम होंगी और वो तब तक हड़ताल पर बैठी रहेंगी, जब उन्हें इंसाफ नही मिलता।

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