देहरादून, डीडीसी। बात बरगला कर शादी करने और धर्मांतरण की हो या फिर अलग जाति-धर्म में शादी करने की, इस पर पूरे देश मे हंगामा मचा है। दरअसल, इसे सीधे तौर पर लव जिहाद से जोड़ दिया जाता है। अब कई भाजपा शासित राज्य इसके खिलाफ कानून लाने की तैयारी में है। इसके उलट भाजपा शासित उत्तराखंड का अपना ढोल और अपना ही राग है। इस राज्य में सरकार गैर जातीय विवाह पर बतौर प्रोत्साहन राशि 50 हजार रुपये देती है। अब सरकार की ये स्कीम सरकार के ही गले की फांस बन गई है।
हाल-फिलहाल देश में कुछ ऐसा देखने को मिला, जिसने गैर जातीय प्रेम और विवाह को कठघरे में खड़ा कर दिया। खास तौर पर तब, जब यह मसला हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के बीच का हो। ऐसे मामलों का ना सिर्फ राजनीतिकरण किया गया, बल्कि मीडिया में भी बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया। यही वजह है कि भाजपा शासित तमाम राज्य इसके खिलाफ कानून लाने की तैयारी में हैं और इसमें सबसे आगे उत्तर प्रदेश दिखाई देता है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में देश के भीतर गैर जातीय विवाह या फिर धर्मांतरण आसान नही होगा।
वहीं उत्तराखंड व्यवस्थाएं इसके ठीक उलट हैं। यहां सरकार गैर जातीय विवाह करने वालों को प्रोत्साहित कर रही है। सरकार इस तरह विवाह करने वालों को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दे रही है। सरकार की इस योजना के मुताबिक ऐसे कपल शादी के एक साल के भीतर प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन कर सकते हैं। बस इसके लिए इतना ही काफी है कि आवेदक की शादी किसी मान्यता प्राप्त मंदिर, मस्जिद या फिर गिरिजाघर से होनी चाहिए और हां कपल में से कोई एक अनुछेद 341 के तहत अनुसूचित जाति का होना चाहिए।

10 से किया था 50 हजार और अब बैकफुट पर सरकार
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश अंतरजातीय या अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन नियमावली 1976 में संशोधन के जरिये रकम को बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया। जबकि वर्ष 2014 से पहले आवेदक को महज 10 हजार रुपये दिए जाते थे। हालांकि पूरा मामला जब सरकार के कानों तक पहुंचा और खुद को फंसता पाया तो सरकार बैकफुट पर आ गई और इसकी वजह है टिहरी के जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपक घिल्डियाल। दरअसल, घिल्डियाल साहब ने यह कह दिया था कि राष्ट्रीय और सामाजिक एकता के लिए अंतर जातीय और अंतर धार्मिक विवाह सहायक होते है, जिसके बाद बखेड़ा खड़ा हुआ।

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