– कोरोना भांजे को थी ICU बेड की दरकार

देहरादून, डीडीसी। उत्तराखंड (Uttrakhand) में कोरोना संक्रमण का बढ़ता दायरा और बढ़ते दायरे के साथ सीमित स्वास्थ संसाधन कम पड़ते जा रहे हैं। इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि राज्य का एक कैबिनेट मिनिस्टर अपने कोरोना संक्रमित भांजे के इलाज के लिए दर-दर भटकता रहा। उसे ICU बेड की जरूरत थी और शरीर में ऑक्सीजन लगातार कम होती जा रही थी। पूरे दिन की जद्दोजहद और दर्जनों फोन घड़घड़ाने के बाद आखिरकार शाम ढलते-ढलते एक प्राइवेट अस्पताल में आईसीयू बेड का इंतजाम हो गया। हम बात कर रहे हैं वन मंत्री (Forest Minister) हरक सिंह रावत (Dr. Harak Singh Rawat) के कोटद्वार (Kotdwar) में रहने वाले भांजे की।

दून से लेकर एम्स तक कर डाले फोन
शुक्रवार रात डा. हरक सिंह रावत के कोरोना पीड़ित भांजे का ऑक्सीजन लेबल अचानक कम होने लगा। ऐसे में उसे हरक के देहरादून स्थित दून डिफेंस कॉलोनी आवास में आइसोलेट किया गया। बावजूद इसके मरीज को हालत में सुधार नही हुआ। मरीज को तत्काल आईसीयू बेड की जरूरत थी। ऐसे में देहरादून से लेकर एम्स ऋषिकेश तक धड़ाधड़ फोन घुमा दिए गए, लेकिन आईसीयू कहीं खाली नही मिला।

देर शाम मिला प्राइवेट अस्पताल में ICU
इतना ही नही, एम्स के बाद अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों में भी आईसीयू के लिए फोन लगाए गए, लेकिन इंतजाम नही हुआ। और तो और खुद वन मंत्री ने भी कई अस्पतालों में फोन पर बात की, लेकिन बात नही बनी। इसी काम मे पूरा दिन गुजर गया और सूरज ढलने लगा। आखिरकार देर शाम एक प्राइवेट अस्पताल में आईसीयू का इंतजाम हो पाया, जिसके बाद मंत्री के भांजे को भर्ती कराया जा सका।

अफसर बातें ज्यादा काम कम करते हैं”
इस पूरे मामले को लेकर वन मंत्री डॉ हरक सिंह रावत खासे खफा नजर आए। उन्होंने इस बदहाली का ठीकरा प्रदेश के अफसरों के सिर फोड़ा और कहा कि ये सब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की लापरवाही की वजह से हो रहा है। ये अफसर सरकार के सामने बातें तो बहुत ज्यादा करते हैं, लेकिन काम कम करते हैं। उन्होंने कहा, मेरे भांजे को आईसीयू की जरूरत थी और मैंने खुद दून अस्पताल, एम्स ऋषिकेश सहित राजधानी के तमाम बड़े निजी अस्पतालों में फोन किया,, आईसीयू बेड नहीं मिला।

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