– 11 दिन पहले बंद हुआ टनकपुर-चम्पावत राष्ट्रीय राजमार्ग आज तक नहीं खुला

चम्पावत, डीडीसी। तकरीबन 12 हजार करोड़ से तैयार हो रहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का ड्रीम प्रोजेक्ट चारधाम ऑलवेदर रोड (Chardham Allweather Road) पहला वेदर झेल ही नहीं पाया। जबकि केंद्र सरकार की धार्मिक पर्यटन (religious tourism) और सामरिक रणनीति (strategic strategy) के लिहाज से ये प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण है। फिलहाल तो आलम ये है कि सभी मौसम के माकूल बताई जा रही ये ऑलवेदर रोड टनकपुर-चम्पावत राष्ट्रीय राजमार्ग (Tanakpur-Champawat National Highway) पर स्थित स्वाला मन्दिर (Swala Mandir) के पास पिछले 11 दिन से बंद है। सड़क का तकरीबन 200 मीटर का हिस्सा मलबे से लदा हुआ है और जी-जान से जुटे प्रशासन की एक भी तरकीब काम नहीं आ रही है।

वर्ष 2016 में हुई थी ऑलवेदर रोड की शुरुआत
चारधाम ऑलवेदर रोड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इसकी शुरूआत 2016 में हुई थी। जैसा कि नाम से जाहिर है कि यहां बनने वाली सड़कों को हर मौसम के हिसाब से बनाया जाएगा। इस परियोजना के तहत करीब 900 किमी लंबी सड़क को चौड़ा किया जा रहा है। यह सड़क केदारनाथ, बदरीनाथ, युमनोत्री और गंगोत्री के साथ ही टनकपुर-पिथौरागढ़ की कनेक्टिविटी वाली सड़क भी है।

ऑलवेदर रोड ने बनाया नया रिकॉर्ड
केंद्र के ड्रीम प्रोजेक्ट ऑलवेदर रोड ने चम्पावत जिले में लगातार 11 दिन बंद रहने का नया रिकॉर्ड बनाया है। इस अजब-गजब रिकॉर्ड ने लोगों की मुसीबत बढ़ा ही हैं। टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑल वेदर रोड इससे पहले अधिकतम सात दिन के लिए बंद हुई थी। फिलहाल तो सड़क कब खुलेगी, अफसरों के पास इसका जवाब नहीं है।

– चम्पावत और टनकपुर के बीच स्वाला में 11 दिन पहले एक पहाड़ी दरक कर ऑल वेदर रोड पर आ गई थी। इससे करीब दो सौ मीटर ऑल वेदर रोड टूट गई है। सड़क के लिए की गई प्रशासन, एनएच खंड और कार्यदायी कंपनी की हर कोशिश नाकाम साबित हुई है। पहाड़ी रुक-रुक कर गिर रहे पत्थर इस नाकामी की एक बड़ी वजह हैं, जिसके आगे एक भी तरकीब काम नही आ रही है।

चोपड़ा कमेटी ने उठाए थे सवाल
ऑलवेदर सड़क के निर्माण के समय से ही पर्यावरणविद इसमें नियमों की अनदेखी और निर्माण के तरीकों पर सवाल उठा रहे है। तमाम विरोधों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने रवि चोपड़ा कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने पिछले वर्ष चारधाम प्रोजेक्ट से पर्यावरण और पारिस्थितिकी को हो रहे नुकसान की रिपोर्ट पर्यावरण मंत्रालय को सौंपी थी। जिसमें पेड़ों के कटान से लेकर अव्यवस्थित तरीके चट्टानों के कटान, डंपिंग जोन और तमाम दूसरी अनियमितताओं पर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में इस बात की भी आशंका व्यक्त की गई थी कि भविष्य में ऑल वेदर रोड बड़े भूस्खलनों के कारण दुर्घटनाओं का सबब बन सकती है।

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