– इस दरबार की टनों-टन घंटियां हैं मुराद पूरी होने की गारंटी

अल्मोड़ा, डीडीसी। मसला कुछ भी हो, निपटाने के लिए बस एक खत (letter) ही काफी है। बस समस्या इतनी है कि इस खत को आप पोस्ट (Post) नही कर सकते। अगर मुराद (Wish) पूरी करनी है तो ये खत आपको खुद पते तक छोड़कर आना होगा। फिर गारन्टी ये है कि मुराद पूरी होगी और बड़ी से बड़ी समस्या (Problem) चुटकियों में निपट जाएगी। मुराद पूरी होने की गारंटी मंदिर (Temple) में टंगी अनगिनत घंटियों दे रही हैं। ये घंटियां मुराद पूरी होने वाले यहां टांगते है। तो आइए चलते हैं उत्तराखंड (Uttrakhand) के सबसे पुराने जिलों के शीर्ष पर सवार अल्मोड़ा (Almora).

घंटियों की छत का अद्भुद एहसास
अल्मोड़ा शहर से आठ किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ हाईवे पर न्याय के देवता गोलू देवता का मंदिर स्थित है। सड़क से कुछ ऊंचे तप्पड़ में गोलू देवता का भव्य मंदिर है। मंदिर में परिसर में प्रवेश करते ही आप खुद को घंटियों से बनी छत के नीचे पाएंगे। इस छत के नीचे आपको एक अलग ही एहसास होगा। मंदिर के अन्दर न्याय के देवता गोलू आपको घोड़े में सवार दिखाई देंगे। उनके हाथों में धनुष-बाण न्याय का प्रतीक है।

तुरन्त न्याय के लिए माने जाते है गोलू देवता
गोलू देवता लोगों को तुरंत न्याय दिलाने के लिए भी प्रसिद्ध हैं। इस‌ कारण गोलू देवता को न्याय का देवता भी कहा जाता है। मुराद पूरी करने के लिए लोग खत और स्टाम्प का इस्तेमाल करते है। इस पर भक्त अपनी मुराद लिखते है और मंदिर में टांग देते हैं। यहां अनगिनत खतों को लटका देख आप हैरान रह जाएंगे। मुराद पूरी होते ही लोग यहां वापस आकर घंटे-घंटियां चढ़ाते है। यहां घंटियों की इतनी संख्या है, जिसे आज तक नही गिना जा सका। दरअसल ये घंटियां मुराद पूरी होने की प्रतीक हैं। इन्हें चितई ग्वेल भी कहा जाता है

शिव के अवतार हैं गोलू देवता
माना जाता है कि गोलू देवता शिव के अवतार है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण चंद वंश के एक सेनापति ने 12वीं शताब्दी में करवाया था। एक अन्य कहानी के मुताबिक गोलू देवता चंद राजा, बाज बहादुर ( 1638-1678 ) की सेना के एक जनरल थे और युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए। पहाड़ी पर बसा यह मंदिर चीड़ और मिमोसा के घने जंगलों से घिरा हुआ है।

19वीं सदी में हुआ मंदिर निर्माण
मंदिर निर्माण को लेकर कोई पुख्ता तथ्य नहीं है, लेकिन माना जाता है कि मंदिर का निर्माण 19वीं सदी की शुरुआत में हुआ था। इनकी मान्यता ना सिर्फ देश बल्कि विदेशो तक है। टनों-टन टंगी घंटियों की वजह से इसे तमाम लोग घंटियों वाला मंदिर भी कहते है।

सात जन्मों का बंधन चाहिए तो आइए
चितई गोलू देवता मंदिर की मान्यता है कि इस दरबार से आज तक खाली कोई नही गया। नवदम्पत्ति को लेकर तो यहां और ही खास मान्यता है। माना जाता है कि यदि कोई नव विवाहित जोड़ा इस मंदिर में दर्शन करे तो रिश्ता सात जन्म तक बना रहता है। यहां न सिर्फ बड़ी संख्या में जोड़े भगवान का आशीर्वाद लेने आते हैं बल्कि स्थानीय लोग यहां विवाह करना और कराना, और भी अधिक शुभ मानते हैं।

कुमाउं के चार गोलू देवता मंदिर
– गोलू देव मंदिर, चितई, अल्मोड़ा
– चम्पावत गोलू मंदिर, चम्पावत
– घोराखाल गोलू मंदिर, घोड़ाखाल
– तारीखेत गोलू मंदिर, ताड़ीखेत

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