– काउंसिल ऑफ साइंटफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ने किया दावा

नई दिल्ली, डीडीसी। कोरोना को दूसरी लहर से जूझ रहे भारत पर तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है। इस बीच काउंसिल ऑफ साइंटफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) की एक रिपोर्ट आई। जो कुछ लोगों के लिए राहत लेकर आई, लेकिन कुछ लोगों के लिए ये बेहद डराने वाली खबर है। इस रिपोर्ट का दावा है कि कोरोना वायरस दो तरह के ब्लड ग्रुप वालों के लिए ही जानलेवा है। CSIR ने इसको लेकर भारत मे व्यापक रिसर्च की है और बताया है कि वायरस की चपेट में यूं तो हर कोई आ रहा है, लेकिन मौतें AB और B ब्लड ग्रुप वालों की ज्यादा हो रही हैं। ऐसे में इन दो खास ब्लड ग्रुप वालों को कोविड-19 के संक्रमण से ज्यादा बच कर रहने की जरूरत है।

O ब्लड ग्रुप वालों पर संक्रमण का सबसे कम असर
CSIR के रिसर्च पेपर में कहा गया है कि जिनका ब्लड ग्रुप O है, उन पर संक्रमण का असर सबसे कम हुआ है। इस ब्लड ग्रुप के ज्यादातर मरीज एसिम्प्टोमेटिक हैं या फिर उनमें बेहद हल्के लक्षण देखे गए हैं। CSIR यह रिपोर्ट देशभर में जुटाए सीरोपॉजिटिव सर्वे पर आधारित है।

मांसाहारी ज्यादा शिकार हो रहे संक्रमण का
रिपोर्ट में कहा गया है कि शाकाहारियों की अपेक्षा मांसाहारियों में कोविड-19 संक्रमण का खतरा ज्यादा है। यह दावा देशभर के करीब 10 हजार लोगों के सैम्पल साइज पर आधारित है और इसका विश्लेषण 140 चिकित्सकों की एक टीम ने किया है। इसमें पाया गया है कि मांस खाने वाले कोरोना मरीजों की संख्या वेजिटेरियन लोगों ने ज्यादा है और वेजिटेरियन में हाई फाइबर ही इस बड़े अंतर की वजह है।

फाइबर में है संक्रमण से लड़ने की शक्ति
फाइबर युक्त डाइट एंटी-इंफ्लेमेटरी होती है, जो न सिर्फ संक्रमण होने के बाद हालात गंभीर होने से बचा सकती है बल्कि इंफेक्शन को शरीर पर हमला करने से रोक सकती है। सर्वे में यह भी बताया गया कि कोरोना के सर्वाधिक मामले AB ब्लड ग्रुप से सामने आए हैं। जबकि B ब्लड ग्रुप वालों में कोरोना संक्रमण की संभावना इससे थोड़ी कम है। वही O ब्लड ग्रुप में सीरोपॉजिटिव सबसे कम देखी गई है।

जेनेटिक स्ट्रक्चर सबसे महत्वपूर्ण
चिकित्सक कहते है कि ये सबकुछ किसी इंसान के जेनेटिक स्ट्रक्चर पर निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर थैलीसीमिया (रक्त से जुड़ी अनुवांशिक बीमारी) के लोग मलेरिया से बेहद कम प्रभावित होते हैं। ऐसा कई मामलों में देखा गया है कि घर के किसी एक सदस्य को छोड़ कर बाकी सबको कोरोना हो गया। ऐसा जेनेटिक स्ट्रक्चर की वजह से ही होता है।

O ब्लड ग्रुप पर अभी और शोध की जरूरत
चिकित्सकों का ऐसा मानना है कि O ब्लड ग्रुप वालों का इम्यून सिस्टम AB और B ब्लड ग्रुप वालों की तुलना में ज्यादा बेहतर ढंग से कम करता है। हालांकि इस पर अभी और शोध की जरूरत है, लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल भी नही कि O ब्लड ग्रुप के लोग कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना बंद कर दें। O ब्लड ग्रुप के लोग भी वायरस से पूरी तरह सुरक्षित नही हैं, उनमें भी जटिल लक्षण विकसित हो रहे हैं।

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