– चम्पावत नगर पालिका में भ्रष्टाचार का बोलबाला

चम्पावत, डीडीसी। बने रहो लुल्ल और तनख्वाह पाओ फुल… ऐसा ही एक माजरा उत्तराखंड के चम्पावत से सामने आया है। जहां भष्टाचार को अंजाम तक पहुंचाने के लिए एक अफसर को लापरवाह साबित कर घर बैठे फुल तनख्वाह दी जा रही है और उसके बदले सरकारी काम किसी और से कराए गए। अब जब मामला खुला तो जवाबदार लच्छेदार बातों में बरगलाते नजर आए। आइए जानते हैं कि आखिर नगर पालिका चम्पावत से जुड़ा ये पूरा माजरा क्या है।

अस्थाई कर्मचारी क्यों कर रहा प्रधान सहायक का काम
नगर पालिका में करीब डेढ़ साल पहले योगेश कुमार बालियान की बतौर प्रधान सहायक तैनाती हुई, लेकिन ईओ और पालिकाध्यक्ष ने आज तक योगेश को कार्यभार नहीं सौंपा। योगेश एक स्थाई कर्मचारी है, बावजूद इसके एक अस्थाई कर्मचारी से स्थाई कर्मचारी से कराया जा रहा है। अब ऐसे में सवाल तो खड़े होंगे ही कि आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है। ये भ्रष्टाचार की तरकीब नही तो और क्या है? अगर योगेश लापरवाह है तो उस पर कार्रवाई क्यों नही की गई?

योगेश रोज आते हैं दस्तखत करने
योगेश ने पालिका से जब भी काम मांगा तो मना कर दिया गया। डेढ़ साल से पालिका उन्हें बगैर कार्य कराए वेतन दे रही है। ऐसे में योगेश भी प्रतिदिन कार्यालय आते हैं और उपस्थिति रजिस्टर पर चिड़िया बिठा देते हैं। इसके बाद कुछ देर दोस्तों संग इधर-उधर की गपशप होती है और फिर प्रधान सहायक योगेश कुमार बालियान की नौकरी पूरी हो जाती है। ऐसे ही बिना काम फुल सैलरी के डेढ़ साल गुजर गए।

घोटालों की पालिका, जांच में असफर दोषी
पूर्व ईओ अभिनव कुमार के कार्यकाल के दौरान पालिका में कई घोटाले हुए। ये घोटाले आरटीआई के जरिए सामने आए थे। मामले में प्रशासन की कराई जांच में ईओ व दो कर्मचारियों को दोषी मानते हुए निदेशालय ने कार्यवाही के लिए फाइल कार्मिक में करीब एक साल पूर्व भेजी गई, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।

योगेश जैसे और कई लोग हैं अभी
घोटालों की पड़ताल में पता चला कि कार्यालय के कई अहम पटल के कार्य अस्थाई या वैकल्पिक तौर पर रखे कर्मचारियों से दिखवाए जा रहे है और नियमित कर्मचारियों से काम नहीं लिया जा रहा या फिर उनसे अन्य कार्य कराए जा रहे हैं। इसी पड़ताल में एक नाम सामने आया प्रधान सहायक योगेश कुमार का।

सचिव भी नही दिला सके योगेश को तैनाती
योगेश की तैनाती 10 फरवरी 2020 को लोक सेवा आयोग से प्रधान सहायक पद पर हुई। उनकी तैनाती के बाद से आज तक उन्हें चार्ज नहीं दिया गया। चार्ज न मिलने पर उन्होंने इसकी शिकायत पूर्व ईओ, पालिकाध्यक्ष, शहरी निदेशालय, सचिव से भी की, लेकिन वहां से भी कोई हल नहीं निकला।

DM के आदेश को भी धता बता दिया
ईओ व पालिकाध्यक्ष को योगेश से ज्यादा भरोसा अस्थाई कर्मचारी पर है। लिपिक योगेश का आरोप है कि नए ईओ भुवन चंद्र जोशी के आने के बाद पुन: कार्य मांगा तो पालिकाध्यक्ष ने कार्यभार नहीं दिया। इस पर डीएम विनीत तोमर से शिकायत की गई। डीएम के आदेश पर निर्माण व स्टोर पटल चार्ज देने का आदेश तो हुआ, लेकिन चार्ज हैंडओवर उसके बाद भी नहीं दिया गया।

माली को दे दिया गया स्टोर का कार्य
वर्तमान में माली के पद पर वैकल्पिक तौर पर नियुक्त हुए कर्मचारी से स्टोर का कार्य दिखवाया जा रहा है। निर्माण कार्य देख रही कर्मचारी के मातृत्व अवकाश पर जाने के बाद भी चार्ज मुझे न देकर बड़े बाबू को दिया गया। जबकि मैं अभी भी बगैर कार्य किए वेतन ले रहा हूं।

आए दिन छुट्टी पर रहता है योगेश
पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा ने इस मामले से पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने सारा ठीकरा ईओ के सिर फोड़ दिया हैं उनका कहना है कि तैनाती देने का काम ईओ का होता है। ईओ तो मेरे सामने अभी तक इस तरह की कोई फाइल भी लेकर नही आए हैं। वैसे भी लिपिक योगेश आए दिन अवकाश पर रहते हैं। जिस कारण कार्य को प्रभावित होने से बचाने के लिए उन्हें चार्ज नहीं दिया गया।

पालिकाध्यक्ष ने नहीं देने दिया चार्ज
दूसरी ओर अधिशासी अधिकारी भुवन चंद्र जोशी का कहना है कि पूर्व ईओ व पालिकाध्यक्ष द्वारा चार्ज नहीं सौंपा गया। मैंने चार्ज संभालने के बाद लिपिक योगेश को चार्ज देने का प्रयास किया तो पालिकाध्यक्ष ने मना कर दिया। डीएम के आदेश के बाद पुन: चार्ज देने का प्रयास किया जा रहा है।

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