– चमाचमा सडक़ पर भरी दोपहर फिर बिछा दिया भ्रष्टाचार का तारकोल

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। अगर आपने किसी को सीना ठोंक कर भ्रष्टाचार करते नहीं देखा तो मुखानी चले आइए। मुखानी में भ्रष्टाचार के अगुवाकारों की अगुवाई में ऐसा भ्रष्टाचार हुआ, जिसका कोई सानी नहीं। इन भ्रष्टाचारियों ने जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डाला और एक चमचमाती सडक़ पर भ्रष्टाचार का तारकोल बिछा दिया। हम बात कर रहे हैं मुखानी चौराहे से आईटीआई की ओर जाने वाली नहर कवरिंग रोड की। इस सडक़ को बनाने की कोई जरूरत नहीं थी। बावजूद इसके अंधेरी रात में सडक़ का काम चुपचाप शुरू किया गया और अगले दिन जनता की खुली आंखों में मिर्च झोंक कर सडक़ पर कमीशन का पॉलिस पोत डाला। आखिर, ये पैसा जनता का था या फिर काला धन… जिसे काले तारकोल में मिला कर सफेद कर दिया गया। क्यों जिले के अफसर को ये सब नहीं दिखाई दिया या फिर देखने की कोशिश ही नहीं की गई। आज हम आपको तीन तस्वीरें दिखा रहे हैं और ये तस्वीरें सब कुछ बयां करने के लिए काफी हैं।

आधा माल, आधी मेहनत और पूरा दाम
जब एक जर्जर सडक़ का पुर्ननिर्माण किया जाता है तो उसमें बहुत मेहनत लगती है। एक-एक इंच का इस्टीमेट तैयार किया जाता है, फाइल बनती है और महीनों बाबूओं की टेबल के चक्कर काटने के बाद तब कहीं जा कर टेंडर होता है। उसके बाद भी कुछ महीने लग जाते हैं जर्जर सडक़ का निर्माण होने में, लेकिन यहां तो कुछ और ही हुआ। ठेकेदार को एक चमचमाती सडक़ तोहफे में दे दी गई। जिसे न तो नापने की जरूरत थी, न गड्ढे भरने या उसे साफ करने की और न ही सडक़ पर दोबारा गिट्टी बिछाने की। करना था तो सिर्फ इतना ही तारकोल से सनी गिट्टियों को बिछा देना था। कुल मिलाकर सडक़ में आधा माल लगा, आधी मेहनत लगी और दाम पूरा मिला।

क्यों नहीं दिखाई दी शहर की जर्जर सडक़ें
शहर में जर्जर सडक़ों की कोई कमी नहीं है, लेकिन भ्रष्टाचार का तारकोल वहां नहीं डाला गया जहां जरूरत थी। 1 मार्च की रात और 2 मार्च की दोपहर जिस चमाचमा सडक़ को फिर से लाली-लिपिस्टक लगा कर चमका दिया गया, उसी के पास जर्जर सडक़ों का अंबार है। हालांकि उस ओर तो देखने की जहमत ही नहीं उठाई गई। मसलन रामपुर रोड से नीलकंठ हॉस्पिट की ओर जाने वाली सडक़ को ही देख लीजिए। ये व्यस्त सडक़ आईटीआई से होते हुए ईको टाउन की ओर निकलती है। करीब तीन किलो मीटर की सडक़ पूरी तरह जर्जर है और सालों से अपनी मरम्मत का इंतजार कर रही है, लेकिन इस बेचारी सडक़ पर किसी भ्रष्टाचारी की नजरें इनायत नहीं हुईं।

नजरें तो इन बेचारी सडक़ों पर भी इनायत नहीं हुईं
शहर की बातें तो लगभग आंतरिक सडक़ें जर्जर और गलियां बेहाल हैं। ऐसी सडक़ों की कोई कमी नहीं जो अर्से से जर्जर है और अपनी बारी की बाट जोह रही है, लेकिन इन पर आज तक नजरेंं इनायत नहीं हुई। एक बानगी हमने आपको रामपुर रोड से नीलकंठ हॉस्पिटल की ओर जाने वाली सडक़ की दी। अब कुछ और सडक़ों के बारे में बतातें है। कालाढूंगी रोड परपीलीकोठी तिराहा है। पीलीकोठी की ये सडक़ पर ईको टाउन पर मिलती। दमुआढूंगा-पनचक्की चौराहे से काठगोदाम की ओर जाने वाली सडक़ और आरटीओ रोड। ये सब अर्से से बदहाल हैं।

पूरे इलाके में चर्चा है इस खुले भ्रष्टाचार की
27 फरवरी 2021 को चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर में काम करने वाले तौकीर ने सेंटर के सामने सडक़ का एक गड्ढा भरा। इस गड्ढे के लिए तौकीर एक महीने से जिला अधिकारी कार्यालय को फोन कर रहे थे। कभी इस तो कभी उस विभाग का नंबर देकर उन्हें टरकाया जा रहा था। गड्ढा भरने के दो दिन बाद अचानक इस सडक़ को चमाचम कर दिया गया। तब से पूरे इलाके में सडक़ निर्माण का काम चर्चा में है। लोग यही बात कर रहे हैं कि आखिर इस सडक़ को बनाने की जरूरत क्या थी, जब कि पास ही दूसरी सडक़ें जर्जर हैं।

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