– बरगला रहा था पुलिस को, धरा गया हत्यारा चचेरा भाई

लक्सर, डीडीसी। उत्तराखंड में रिश्तों को एक शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। इस मामले में एक चचेरे भाई ने अपनी ही बहन को हवस का शिकार बना डाला। अपने कुकर्म पर पर्दा डालने के लिए इस कुकर्मी हत्यारे भाई ने गला घोंट कर बहन को मार डाला। उसने लाश भी ठिकाने लगा दी, लेकिन पुलिस से कातिल बच नही पाया। वारदात के 4 दिन बाद पुलिस ने आरोपी को धर दबोचा और उसने अपना गुनाह भी कुबूल कर लिया। मामला उत्तराखंड में खानपुर थाना इलाके के एक गांव का है।

बहन ने बोझ उठाने के लिए बुलाया था
लड़की की महज 20 साल थी और 30 मार्च को वो खेत मे बरसीम काट रही थी। वही पास में आरोपी चचेरा भाई हरेंद्र पुत्र राजपाल खेत की जुताई कर रहा था। बरसीम काटने के बाद बोझ बनाया और बोझ उठाने के लिए उसने हरेंद्र को बुला लिया। बोझ उठाने के दौरान ही हरेंद्र की नीयत डोल गई और उसने अपनी ही बहन को हवस का शिकार बना डाला। बताया जाता है कि लड़की ने बचने की लाख कोशिश की, लेकिन वो हरेंद्र के चंगुल से आजाद महि हो पाई। उसने हरेंद्र को धमकाया भी कि वो उसकी करतूत सबको बता देगी।

राज खुलने के डर से बंद कर दी बहन की जुबान
हवस में अंधा हो चुका हरेंद्र वो कर चुका था, जो उसे नही करना चाहिए था और अब उसे डर था कि उसकी करतूत सबके सामने आ जाएगी। इसके लिए मृतका ने भी हरेंद्र को धमकाया था। इसी डर की वजह से हरेंद्र मौके पर ही बहन का गला घोंट कर मौत की नींद सुला दिया। बहन का कत्ल करने के बाद उसने लाश भी ठिकाने लगा दी, जो अगले दिन बरामद हुई। इस मामले का खुलासा शनिवार को एसएसपी सैंथिल अबुदई कृष्णराज एस ने खानपुर थाने में किया।

नाले किनारे ठिकाने लगाई लाश
बहन का कत्ल करने के बाद हरेंद्र के सामने सबसे बड़ी समस्या लाश को ठिकाने लगाने की थी। वो लाश को वहीं छोड़कर नही जा सकता था, क्योंकि वो भी पास के खेत मे जुताई कर रहा था। ऐसे में हरेंद्र ने नाले किनारे लाश ठिकाने लगा दी। इधर, न लौटने पर परिजन उसकी तलाश कर रहे थे। अगले दिन उसका शव खेत के पास नाले के किनारे पड़ा मिला था।

हत्यारे ने खूब टहलाया पुलिस को
इस मामले युवती के भाई ने खानपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। स्थानीय पुलिस के अलावा रुड़की सीआईयू यूनिट को इसके खुलासे में लगाया गया। हरेंद्र से भी इस मामले में पूंछताछ हुई। जितनी बार उससे पूंछताछ होती, उतनी बार वो बयान बदलता। पुलिस को शक हुआ और हरेंद्र को हिरासत में लिया गया। उसने बताया कि वह 11 बजे पिता के साथ वापस आ गया था, जबकि पिता ने कहा कि वह बेटे को वहीं छोड़कर आ गया था। हरेंद्र फंस चुका था और सच्चाई उगलने के सिवा उसके पास कोई चारा नही बचा।

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