नई दिल्ली, डीडीसी। दुनिया का महान फुटबॉलर माराडोना नही रहे। हाल ही ब्रेन सर्जरी से रिकवर हो रहे इस महान खिलाड़ी को कल दिल का दौरा पड़ गया। इससे पहले कि उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता, उनकी घर पर ही मौत हो गई। मौत पर पूर्व भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली ने तो यहां तक कह दिया कि वह फुटबॉल केवल माराडोना की वजह से ही देखते थे।
‘हैंड ऑफ गॉड’ गोल के लिए मशहूर फुटबॉलर डिएगो माराडोना 60 साल के थे। दो हफ्ते पहले उन्हें दिमाग में क्लॉटिंग भी हुई थी। जिसके बाद उनकी सर्जरी हुई थी। डिएगो माराडोना ने साल 1986 में अर्जेंटीना को फुटबॉल वर्ल्ड कप जिताया था। उनके एक विवादित गोल ने इंग्लैंड को जीत से महरूम कर दिया। गोल माराडोना के हाथ से लगकर हुआ था, लेकिन रेफरी यह देख नहीं सके और अर्जेंटीना वर्ल्ड चैंपियन बन गया। माराडोना का यही गोल फुटबॉल इतिहास में ‘हैंड ऑफ गॉड’ के नाम से मशहूर है। इसके बाद शोहरत माराडोना के कदम चूमने लगी, लेकिन ये शोहरत अपने साथ कुछ गलत चीजें भी लेकर आई। माराडोना को कोकीन लेने की लत गई। उन्होंने 1991 में नेपोली छोड़ दिया और ड्रग की वजह से 15 महीनों का बैन झेलना पड़ा। ड्रग टेस्ट में फेल होने पर वर्ष 1994 के वर्ल्ड कप से भी उन्हें बाहर कर दिया गया। माराडोना को दिल से जुड़ी बीमारियां साल 1999 में ही लग गई थीं जब उन्हें दो बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

शोहरत के साथ विवाद भी खूब मिला
माराडोना का जादू अपने प्रशंसकों के सिर चढ़ कर बोल रहा था। खेल में माराडोना का जुनून देखते बनता था। माराडोना एक ओर जहां मैदान पर एक बेहतरीन फुटबॉलर रहे, वहीं दूसरी ओर मैदान के बाहर वो कई विवादों की वजह से बदनाम भी हुए। माराडोना को पहले तो शराब की लत लगी और फिर वह कई तरह के नशे में फंस गए। नशे की वजह से ही उनका करियर अर्श से फर्श पर आ गया और वह डिप्रेशन का शिकार हो गए। यही वजह थी कि उन्हें दो बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बावजूद इसके प्रशंसको की मोहब्बत माराडोना से कम नही हुई।

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