– तिहाड़ में कैद बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन की कोरोना से मौत

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। सौ कत्ल कीजिए, महिलाओं का चीर हरण कीजिए, गुनाहों का देवता बन जाइए और फिर सियासतदानों की सरपरस्ती में बैठ जाइए। यकीन मानिए आपके सारे पाप धुल जाएंगे। एक टुच्चा गुंडा पहले बदमाश बना और फिर डॉन। इसके जुर्म का घड़ा भरा तो सियासतदानों की सरपरस्ती हासिल की और सियासत में उतर गया, लेकिन एक गुनाह उसके लिए नासूर बन गया। ये गुनाह था वर्ष 2004 में बिहार के सिवान का तेजाब कांड और इसे अंजाम दिया था उसी टुच्चे गुंडे शहाबुद्दीन ने, जो सिवान में सियासत का सिरमौर बन चुका था। तिहाड़ जेल में बंद आज इस दुर्दांत कातिल की कोरोना से मौत हो गई और कुछ सियासतदान उसकी मौत फूट-फूट कर आंसू बहा रहे हैं। छी ऐसे नेताओं और एक सवाल आज आपसे कि क्या ऐसे हत्यारों के लिए किसी भी तरह की हमदर्दी वाजिब है?

39 हत्या और अपहरण के मामले थे शहाबुद्दीन पर
शहाबुद्दीन के खिलाफ 39 हत्या और अपहरण के मामले थे। निचली अदालत से उसे कई मामलों में सजा हुई। 38 मामलों में उसे जमानत मिल चुकी थी। 39वां केस राजीव का था। जो अपने दो सगे भाईयों (तेजाब कांड) की हत्या का चश्मद्दीद गवाह था। मगर 2014 में उसकी हत्या के साथ ही शहाबुद्दीन की जमानत का रास्ता साफ हो गया था। आखिरकार 11 साल बाद शहाबुद्दीन जमानत पर बाहर आ गया, लेकिन उनके बाहर आने से सूबे की सियासत में हलचल मच गई। तब सरकार की पहल पर सुप्रीम कोर्ट ने शहाबुद्दीन की जमानत रद्द कर दी और उसे फिर से जेल जाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने दो भाईयों की मौत के मामले में भी उसकी सजा को बरकरार रखने का फरमान सुना दिया है।

ये हैं बिहार के युवा और होनहार नेता तेजस्वी की ओजस्वी भावनाएं
पूर्व बाहुबली राजद सांसद के निधन पर राजद नेता सह नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं ने ट्वीटर पर श्रद्धांजलि पेश की। तेजस्वी ने लिखा कि – पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का कोरोना संक्रमण के कारण असमय निधन की दुःखद ख़बर पीड़ादायक है। ईश्वर उनको जन्नत में जगह दें, परिवार और शुभचिंतकों को संबल प्रदान करें। उनका निधन पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है। दुख की इस घड़ी में राजद परिवार शोक संतप्त परिजनों के साथ है।

पप्पू बोले, सियासत और सिस्टम का शिकार हुए शहाबुद्दीन
पूर्व सांसद और जाप सुप्रीमो पप्पू यादव ने श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि सिवान के शहाबुद्दीन जी को भी आखिर कोरोना ने लील लिया। लेकिन वह कोरोना से अधिक सिस्टम और सियासत के शिकार हुए। मतलब के अनुसार इस्तेमाल किया, फिर अंतहीन जलालत झेलने अकेला छोड़ दिया। मेरी संवेदना शहाबुद्दीन जी के परिजनों एवं चाहने वालों के साथ है। खुदा रहम करें, सबको सब्र दें!

बिहार के मशहूर तेजाब कांड पर सरसरी नजर
– बात वर्ष 2004 की है। बिहार के सीवान जिले में चंद्रेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू अपनी पत्नी, बेटी और चार बेटों के साथ रहा करते थे।
– उनकी मुख्य बाजार में दो दुकानें थीं। एक दुकान पर उनका बेटा सतीश और दूसरे पर गिरीश बैठता था।
– 16 अगस्त, 2004 को शहाबुद्दीन के गुंडे दुकान पर दो लाख की रंगदारी मांगने पहुंचे।
– मना किया तो लाखों का गल्ला लूट लिया और दुकान को आग लगा दी।
– बदमाशों ने सतीश, राजीव व तीसरे भाई को अगवा कर लिया।
– सरेआम सतीश और गिरीश तेजाब से जला कर मार डाला गया।
– ये सब रस्सी से बांधे गए राजीव की आंखों के सामने किया गया।
– दोनों की लाश के टुकड़े-टुकड़े कर बोरे में भर कर फेंक दी गई।
– दो दिन बाद राजीव कैद से भाग निकला चैनपुर जा पहुंचा।
– राजीव ने उत्तर प्रदेश के पड़रौना के स्थानीय सांसद के घर शरण ली।
– तत्कालीन डीआईजी ए.के. बेग मृतकों के पिता चंदा बाबू को सुरक्षा मुहैया कराई।
– एक दिन उनका बेटा राजीव लौट आया। उसके साथ चंदा बाबू की पत्नी, बेटियां और विकलांग भाई भी वापस आ गए।
– कुछ दिनों बाद राजीव की शादी हो गई।
– शादी के 18वें दिन ही 16 जून, 2014 को राजीव की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई।
– राजीव अपने भाईयों की हत्या का अकेला चश्मदीद गवाह था और वह कोर्ट में बयान दे चुका था।
– 2004 में तेजाब कांड के नाम से मशहूर सनसनीखेज हत्याकांड में शहाबुद्दीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज हुआ, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई।
– वर्ष 2005 में बिहार में नीतीश कुमार की सरकार आई और उसी साल शहाबुद्दीन को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया।
– सुप्रीम कोर्ट ने शहाबुद्दीन को उम्र कैद की सजा सुनाई थी।

--Advertisement--

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here