– चमोली के ऊंचाई वाले इलाकों में मिलती है सबसे कीमती कीड़ा जड़ी

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। कीड़ा जड़ी एक ऐसा नाम जिसे उत्तराखंड में तो लगभग सभी जानते हैं। यौन शक्ति के लिए अचूक मानी जाने वाली ये औषधि बेशकीमती है। ये जड़ी उत्‍तराखंड (Uttrakhand) के चमोली जिले के ऊंचाई वाले स्थानों पर मिलती है। चमोली में ग्‍लेशियर फटने (Chamoli Glacier Burst) की घटना ने तबाही मचा दी। आपदा में 150 से ज्‍यादा के मारे जाने की आशंका है। जिस इलाके में यह घटना हुई है, वहां दुनिया की सबसे कीमती जड़ी-बूटी मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहद कीमती कीड़ा जड़ी (Worm Herb) को पाने के लिए लोग ग्‍लेशियरों (Glaciers) तक पहुंच जाते हैं और वहां की बर्फ को खोद डालते हैं। प्रकृति के साथ हो रहे इस खिलवाड़ का ही मिलाजुला असर आपदा (Disaster) के रूप में दिखाई देता है।

50 लाख रुपये प्रति किलो है इसकी कीमत
कीड़ा जड़ी की कीमत अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में काफी ज्‍यादा है। आजकल यह करीब 50 लाख रुपये किलो के हिसाब से बिक रही है। यही वजह है कि लोग इसे पाने के लिए बर्फ के पहाड़ों को खोदने तक से बाज नहीं आते। जिसकी वजह से प्रकृति को काफी नुकसान पहुंचता है। बर्फ में आठ-आठ इंच तक छेद होने से बर्फ पिघलने की प्रक्रिया जल्‍दी शुरू हो जाती है जो बाद में तबाही लेकर आती है।

डोपिंग टेस्ट में भी पकड़ नही आती जड़ी
उत्‍तराखंड में ईको टास्क फोर्स के पूर्व कमांडेंट ऑफिसर कर्नल हरिराज सिंह राणा बताते हैं कि कीड़ा जड़ी का इस्‍तेमाल दवा के रूप में होता है। इसमें प्रोटीन, पेपटाइड्स, अमीनो एसिड, विटामिन बी-1, बी-2 और बी-12 जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं। अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर स्‍तर पर यह खिलाड़ियों के लिए इस्‍तेमाल की जाती है। खास बात है कि यह डोपिंग टेस्ट में यह पकड़ी भी नहीं जाती है।

हिमालयन वायग्रा है कीड़ा जड़ी
यह जड़ी-बूटी बहुत ही कीमती होती है और मुख्‍यतया हिमालय (Himalaya) के दुर्गम इलाकों में मिलती है। इसे हिमालयन वायग्रा या यार्सागुम्‍बा भी कहा जाता है। इस जड़ी की डिमांड इतनी है कि इसकी तस्करी तक की जाती है। कई दफा लोग पकड़े भी जाते हैं। बेहद मंहगी होने के कारण लोग महीनों के लिए अपना घर छोड़ देते हैं और ग्लेशियर पर कीड़ा जड़ी की तलाश में जुटे रहते हैं। ऐसे लोगों की संख्या बहुत है जिन्होंने कीड़ाजड़ी की तलाश को अपना मुख्य काम बना लिया है।

किडनी, फेफड़े मजबूत और शुक्राणु बढ़ती है
इस जड़ी को किडनी, फेफड़ों और गुर्दे को मजबूत करने, शुक्राणु उत्पादन में वृद्धि और रक्त उत्पादन में वृद्धि, ऊर्जा और जीवन शक्ति को बढ़ाने, रक्तचाप को रोकने में भी इसे बेहद शक्तिशाली और प्रभावी दवा माना जाता है। आपको बता दें कि इस जड़ी पर सालों से शोध चल रहा है और अभी तक ऐसा एक भी मामला प्रकाश में नही आया, जहां यह पता लगा हो कि इसके सेवन से किसी को नुकसान हुआ हो या मौत हुई हो।

जहां कुछ नही उगता, वहां पनपती है कीड़ा जड़ी
कीड़ा जड़ी यह एक फफूंद होती है, जो पहाड़ों के 3500 मीटर ऊंचाई पर मिलती है, जहां ट्रीलाइन ख़त्म हो जाती है यानी जहां पेड़ उगने बंद हो जाते हैं। इसके बनने की पूरी प्रक्रिया एक कीट के द्वारा होती है। कैटरपिलर का प्यूपा लगभग 5 साल तक हिमालय और तिब्बत के पठारों में दबा रहता है। इसकी सूंडी बनने के दौरान इस पर ओफियोकार्डिसिपिटैसियस वंश की फफूंदी लग जाती है, जो धीरे-धीरे इसके शरीर में प्रवेश कर जाती है। बाद में यह उस कीट की सूंडी से ऊर्जा लेती है और कीट के सिर से बाहर निकलती है। यह किसी कीड़े की तरह ही दिखाई देती है। इसी लिए इसका लोकप्रिय नाम कीड़ा जड़ी है। इस तरह इसके बनने की प्रक्रिया काफी जटिल और लंबी है। यही वजह है कि यह हर जगह नहीं मिलती।

--Advertisement--

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here