– पिता और भाई की मौत के बाद जिम्मेदारियों से लड़ी सैनिक की बेटी ने जंग

हल्द्वानी, डीडीसी। सैनिक पिता की मृत्यु हो गई। बड़ा भाई भी नहीं रहा और सदमे ने मां को बिस्तर पर ला दिया। छोटा भाई नादान था और जिम्मेदारियों से जंग लड़ने की जिम्मेदारी घर की बेटी पर थी। अपनी खुशियों को दरकिनार कर सैनिक की इस बेटी ने जिम्मेदारियों से जंग लड़ी और जीती भी। अब इस जीत का ईनाम सेना ने अपने सैनिक की बेटी को उनकी पेंशन का हकदार बना कर दिया है।

काठगोदाम निवासी राम सिंह भारतीय नौ सेना से 1999 मे सेवा निवृत हुए। उनके दो बेटे और एक बेटी है। 2011 मे उनकी मृत्यु हो गई और कुछ समय बाद बड़े बेटे की भी मृत्यु हो गई। इस सदमे में राम सिंह की पत्नी बीमार हो गईं। उनकी देखभाल के लिए कोई नहीं था और बेटा-बेटी अविवाहित थे।

ऐसे में बेटी गीता मां की सेवा के लिए नौकरी छोड़ दी। बिस्तर पर पड़ी मां के कई बार कहने के बावजूद गीता ने मां की सेवा नहीं छोड़ी और न ही शादी की। एक रोज गीता की मां भी चल बसीं। गीता ने भाई की शादी कर संरक्षक की भूमिका निभाई, लेकिन उनका खुद का जीवन एकांकी हो गया।

ऐसे में गीता ने पिता की पेंशन का हक पाने के लिए आवेदन करना चाहा तो किसी पूर्व सैनिक ने उन्हें उत्तराखंड पूर्व सैनिक लीग का पता और अध्यक्ष मेजर बीएस रौतेला का मोबाइल नंबर दिया। गीता अपनी फरियाद लेकर लीग कार्यालय पहुंची। यहां सभी औपचारिकता पूरी कर प्रपत्र भेजे गए।

मंगलवार को गीता अपना पीपीओ लेकर लीग कार्यालय पहुंची। उन्होंने लीग का आभार प्रकट किया और कहा कि मेजर बीएस रौतेला के प्रयास पर आभार जताया। उन्होंने काह, मेजर रौतेला का व्यवहार ऐसा लगा जैसा एक पिता का पुत्री के साथ होता है।

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