न्यूज डेस्क, डीडीसी। अब देश में न कोई दूल्हा घोड़ी चढ़ेगा और न ही किसी बिटिया के हाथ पीले होंगे। कुल मिला कर अब देश में किसी के घर से शहनाई की आवाज सुनाई नहीं देगी। अब सोच रहे होंगे कि ये हम क्या बता रहे हैं आपको। तो गुरू जी ये खबर बिल्कुल सही है, लेकिन आपको डरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि न तो लॉक डाउन लगने वाला है और न ही सरकार ने शादियों पर कोई पाबंदी लगाई है। पाबंदी का ये खेल तो शुभ और अशुभ मुहुर्त का है।

सरल भाषा में समझाया जाए तो अब 22 अप्रैल तक शादियों के लिए शुभ मुहुर्त नहीं है। 15 दिसंबर से खरमास आरंभ हो रहा है और खरमास आरंभ के साथ ही हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार शुभ कार्यों का आयोजन बंद कर दिया जाता है। अगले साल भी विवाह का शुभ मुहुर्त आधा अप्रैल गुजर जाने के बाद ही आएगा। यानी बैंड-बाजा भी आधा अप्रैल गुजर जाने के बाद ही बजेगा। जनवरी से मार्च 2021 तक विवाह का एक भी मुहुर्त नहीं है। इस मामले में ज्योतिषाचार्यों की राय मानें तो वर्ष 2021 में शादियों के लिए केवल 50 दिन उपलब्ध होंगे। ब्रहस्पति और शुक्र ग्रह के कारण साल के शुरुआती महीनों में विवाह नहीं हो सकेंगे। मकर संक्रांति के बाद 19 जनवरी से 16 फरवरी तक गुरु अस्त रहेंगे। इसके बाद 16 फरवरी से 17 अप्रैल तक शुक्र अस्त रहेंगे और इसी की वजह से विवाह का पहला मुहुर्त 22 अप्रैल को बनेगा। इसके बाद विवाह के कुल 37 मुहुर्त आपको मिलेंगे। जबकि 15 नवंबर को देव उठनी एकादशी से 13 दिसंबर तक विवाह के लिए आपके पास 13 दिन होंगे।

अबूझ मुहुर्त पर भी नहीं बन रहा सात फेरों का योग
वैसे तो वसंत पंचमी को शादियों के लिए अबूझ मुहुर्त माना जाता है। मतलब इस दिन को शादियों के लिए मुफीद वक्त माना जाता है, लेकिन वर्ष 2021 में ऐसा नहीं होगा। अगले साल 16 फरवरी को वसंत पंचमी है, लेकिन इस दिन सूर्योदय के साथ सूर्य अस्त हो जाएंगे। यही कारण है कि पंचांगों में इसे विवाह के लिए सही दिन नहीं माना जा रहा है। वैसे लोक परंपराओं की वजह से उत्तराखंड समेत देश के कई हिस्सों में वसंत पंचमी पर विवाह होते हैं।

इस दिन लोगे सात फेरे तो सात जन्म रहोगे साथ
आपको शादी के लिए अगले साल कई अबूझ मुहुर्त मिलेंगे। कुछ मुहुर्त तो ऐसे हैं, जिन्हें शादियों के लिए बेहद खास दिन माना जाता है और माना जाता है कि इस दिन लिए गए सात फेरे सात जन्मों तक नहीं टूटते। दरअसल, देव प्रबोधिकनी एकादशी पर तुलसी शालिग्राम विवाद की परंपरा है।
मान्यता ये है कि इस दिन किया गया विवाह कभी नहीं टूटता। इसके अलावा अक्षय तृतीया और वसंत पंचमी को भी अबूझ मुहुर्त मानते हुए शादियां की जाती है।

ये होंगे विवाह के शुभ मुहुर्त
अप्रैल- 22, 24, 25, 26, 27, 30
मई- 1, 3, 7, 8, 15, 21, 22, 24
जून- 4, 5, 19, 30
जुलाई- 1, 2, 15
नवंबर- 19, 20, 21, 28, 29, 30
दिसंबर- 1,6,7,11,12,13

--Advertisement--

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here