– पूर्व CM त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान पर एक बार फिर मचा बवाल

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत (Trivendra Singh Rawat) की कुर्सी क्या गई, उनकी वेदना दिल चीर कर मुंह से निकलने लगी। पहले उन्होंने खुद को अभिमन्यु की उपाधि और फिर पार्टी के भीतर कुछ लोगों को कौरव बता दिया। अब वो अपना दिल बड़ा रखने की बात कर रहे हैं, लेकिन अब वो चुप कैसे बैठे, जिन्हें त्रिवेंद्र ने कौरव शब्द से संबोधित किया। ये महाभारत के वही कौरव थे, जिन्होंने अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु का वध किया था। इस पूरी बयानबाजी के बीच कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत (Harak Singh Rawat) ने त्रिवेंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ये वही हरक हैं जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे और आज भाजपा में कैबिनेट मंत्री हैं।

त्रिवेंद्र बोले दिल बड़ा करो, हरक बोले त्रिवेंद्र का दिल संकुचित
गुरूवार को त्रिवेंद्र रावत ने पौड़ी में बयान दिया कि राजनीति में हमको बढ़ा दिल लेकर चलना चाहिए। त्रिवेंद्र रावत के इस बयान पर पहला जवाब सत्तारूढ़ दल के ही कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की ओर से आया। हरक ने कहा कि कौन आज वो बड़ा दिल करने को शिक्षा दे रहा है, जिनका खुद का दिल संकुचित है। हरक का सीधा निशाना त्रिवेंद्र पर था और इसकी एक बड़ी वजह हरक और त्रिवेंद्र के बिगड़ा रिश्ता है। यही वजह है कि पहले भी त्रिवेंद्र के कौरव वाले बयान पर हरक ही जवाब देने आगे आए थे।

क्या हमारे राष्ट्रीय नेता कौरव हैं : हरक
पिछले हफ्ते ही अपने विधानसभा क्षेत्र डोईवाला में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि उनके साथ छल हुआ है. रावत ने खुद को अभिमन्यु बताते हुए कहा कि कौरवों ने भले ही छल से अभिमन्यु को मारा हो, लेकिन द्रोपदी ने इस पर पश्चाताप नहीं किया था, बल्कि प्रतिकार किया था. त्रिवेंद्र रावत ने कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें दु़:खी नहीं होना चाहिए, पांडवों की तरह प्रतिकार करना चाहिए. इस बयान के बाद भाजपा में हलचल शुरू हो गई. सवाल उठता है कि त्रिवेंद्र रावत किसका प्रतिकार करने की बात कह रहे थे। इस पर बोलते हुए हरक ने कहा कि हमें हल्की बयानबाजी से बचना चाहिए। त्रिवेंद्र रावत बताएं कौन कौरव हैं और कौन पांडव हैं। क्या डोईवाला की जनता पांडव हो गई और हमारे रार्ष्टीय नेता कौरव हो गए क्या?

त्रिवेंद्र से नही मिला सम्मान, हरक अब कर रहे हिसाब
तीरथ रावत सरकार में कददावार कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत 2017 में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आने वाले नौ विधायकों में से एक हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से उनकी बीते चार सालों में कभी नहीं बनी। आपको याद होगा कि त्रिवेंद्र सरकार में कर्मकार कल्याण बोर्ड से हरक सिंह रावत को बिना पूछे बाहर कर दिया गया था। उन्होंने इसकी शिकायत दिल्ली हाईकमान से की थी। हरक सिंह रावत की पीड़ा अब खुलकर छलक रही है। त्रिवेंद्र रावत के आउट और तीरथ की एंट्री के बाद हरक एक बार फिर पूरे दबदबे में हैं और त्रिवेंद्र की हर पीड़ा पर फूट कर बोल रहे हैं।

कांग्रेस जैसा हाल अब भाजपा में
उत्तराखंड कांग्रेस की बदहाली किसी से छिपी नही है। यही वजह है कि 2017 में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला, लेकिन त्रिवेंद्र रावत सरकार जाने के बाद जो कुछ भाजपा के भीतर हो रहा है वो कांग्रेस से इतर कतई नही है। तीन-तीन गुट की वजह से कांग्रेस खोई जमीन नही तलाश पा रही और भाजपा हाईकमान ने अगर जल्द दखल न दिया तो भाजपा का हाल भी कांग्रेस जैसा ही होगा। कभी अपने ही नेताओं के खिलाफ बयानबाजी के लिए बीजेपी (BJP) कांग्रेस पर चुटकी लेती थी, लेकिन इन दिनों बीजेपी भी कुछ इसी राह चल पड़ी है।

BJP में भरे पड़े हैं कौरव : प्रीतम सिंह
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि ये बीजेपी का अंदरूनी मामला है, लेकिन आप देखते रहिए धीरे-धीरे सारी चीजें सामने आएंगी। कौरव भी बीजेपी में भरे पड़े हैं। अब यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर भाजपा के भीतर ये कौरव कौन हैं, जिनका जिक्र त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी किया था। क्या ये वही 9 विधायक हैं, जो वर्ष 2017 में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे। इन्हीं 9 विधयकों में से एक हरक सिंह रावत हैं, जो आज अपने भी पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ खुल कर बयानबाजी कर रहे हैं और ऐसा किसी भी पार्टी के हित में नही है।

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