– प्रसाद के रूप में मिलने वाला परमल और इलायची दाना अब नही मिलेगा

हरिद्वार, डीडीसी। प्रसाद यानी परमल और इलायची दाना। लगभग सभी मंदिरों और शुभ कार्यों में परमल और इलायची दानों को ही प्रसाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अब परमल की बात पुरानी होने वाली है और प्रसाद के दोने से इलायची दाना भी गायब होने वाला है। इसकी शुरुआत होगी इसी साल कुंभ से। अब भगवान को भोग और प्रसाद के रूप में उत्तराखंडी चौलाई के लड्डू और मंडुवे की बर्फी ही मिलेगी। इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और इस दफा हरिद्वार के घाटों पर मौजूद दुकानों में चौलाई के लड्डू और मंडुवे की बर्फी ही प्रसाद के रूप में बेची जाएगी। इस प्रसाद का एक खास नाम ‘देवभूमि का भोग’ रखा गया है। प्रसाद को इसी नाम से जाना जाएगा।

लोकल फॉर वोकल और ‘देवभूमि का भोग’
कोविड-19 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकल फ़ॉर वोकल को बढ़ावा देनी की बात कही थी। अब इसका असर भी देखने को मिल रहा है। कुंभ में ‘देवभूमि का भोग’ भी इसी अभियान का हिस्सा है। लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा देने की पहल कुंभ के दौरान भी हरिद्वार में दिखाई देगी। यहां के धार्मिक स्थलों के साथ हरकी पैड़ी के आस-पास प्रसाद के रूप में चौलाई के लड्डू और मंडुवे की बर्फी देने की तैयारी है।

सभी सहमत, 17 फरवरी तक लॉचिंग
प्रसाद की इस नई व्यवस्था के लिए कई मंदिरों, अखाड़ों और दुकानदारों ने सहमति जता दी है। इस प्रसाद को देवभूमि का देवभोग के रूप में प्रचारित किया जाएगा। इस प्रसाद को आगामी 17 फरवरी तक लॉंच करने की तैयारी है। इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए प्रदेश स्तर पर काम किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कुंभ के बाद इस प्रसाद को उत्तराखंड के हर मंदिर और हिन्दू धार्मिक स्थल तक पहुंचाने की तैयारी है।

देश-दुनिया तक पहुंचाने की योजना
हरिद्वार के कई बड़े मंदिरों, अखाड़ों पर वर्षों से चढ़ते आ रहे परमल और इलायची दाने की जगह अब जल्द ही उत्तराखंड के पारंपरिक अनाज चौलाई का लड्डू और मंडुवे की बर्फी ले लेगी। कुंभ खाद्य सुरक्षा विभाग ने इसके लिए तैयारी पूरी कर ली है। भगवान को चढ़ने वाले प्रसाद को पूरी तरह से शुद्ध और स्वच्छ बनाने की यह पहल है। इससे जहां उत्तराखंड के पारंपरिक प्रसाद देश-दुनिया तक पहुंचेगा, वहीं इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

‘तिरुपति के लड्डू’ सा मशहूर होगा ‘देवभूमि का भोग’
उत्तराखंड में नई शुरुआत से लोगों को शुद्ध और अच्छी क्वालिटी का प्रसाद मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह तिरुपति बालाजी सरीखे बड़े धार्मिक स्थलों पर जैसे तिरुपति का लड्डू मशहूर है और वहां पर प्रसाद के रूप में वही दिया जाता है। इसी तरह हरिद्वार में भी पहल की जा रही है। इसके तहत स्थानीय लोगों को साथ जोड़कर प्रसाद का एक ब्रांड विकसित किया जा रहा है। इसके लिए कई स्वयं सहायता समूहों, मंदिर ट्रस्ट, स्थानीय दुकानदारों से वार्ता हो चुकी है, जो इसमें सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

--Advertisement--

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here