– गाय को मां कहने वाला हिंदू समाज क्यों इनका पेट भरने नहीं आता आगे
– अगर गऊ मां को बचाना चाहते हैं तो इस नंबर तक मदद पहुंचाएं

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। धर्म के लिए बात-बात पर सीना तान खड़े होने वालों देखो ये वही गऊ माता हैं, जिनके लिए कितनी बार हिंदुत्व को हिंदू आतंकवाद के नाम से पुकारा गया। ये वही गऊ मां हैं जिनका माखन खाकर कान्हा श्रीकृष्ण बनें और हमने-हमारे शास्त्र, वेदों ने ऐसी गऊ मां को पूजा। आज ये तिल-तिल हर पल तड़प रही हैं। कुछ घायल हैं तो कुछ भूख से बेहाल। जिन्हें इनका खयाल रखना है, वो करोड़ों के कर्ज में डूबे हैं। जेब में पाई नहीं है और कर्ज भी गऊ मां का पेट भरते-भरते हो गया। गऊ मां कराह कर, आवाज देकर मदद को बुला तो नहीं सकतीं, लेकिन आप गऊ मां के मन की सुन तो सकते हैं। डाकिया.कॉम की इल्तजा है कि इनकी मदद कीजिए, आगे आइए, इन्हें बचाइए और अपना अभिमान भी। हल्द्वानी बरेली रोड हल्दूचौड़ स्थित श्रील् नित्यानंदपाद आश्रम (गौरक्षा केंद्र) के लिए कुछ कीजिए।

नोटबंदी और फिर पड़ी लॉकडाउन की मार
ऐसा नहीं है कि हल्दूचौड़ स्थित गौशाला की हालत हमेशा से दयनीय थी। ये स्थिति पिछले कुछ महीनों में बिगड़ी है। पहले नोटबंदी हुई, जिसकी वजह से गौशाला को मिलने वाला दान 90 फीसद तक हो गया। इसके लॉक डाउन की वजह से बचा हुआ 10 फीसद दान मिलना भी बंद गया।

खर्च रोजाना 1 लाख, सरकार सालाना देती है 23 लाख
गौ रक्षा के नाम पर केंद्र सरकार ने बहुत बड़े कदम उठाए हैं, लेकिन ये बड़ा कदम ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। आश्रम के सचिव रामेश्वर दास (रमेश चंद्र जोशी) बताते हैं कि केंद्र सरकार से उन्हें सालाना 23 लाख मिलते हैं और ये 23 दिन में ही खत्म हो जाता है। जबकि गौरक्षा केंद्र को हर रोज गायों का पेट भरने के लिए 1 लाख की जरूरत होती है।

ब्याज के पैसों से भर रहा गौ-माता का पेट
सचिव रामेश्वरदास का कहना है कि हम गौ माता को यूं मरते नहीं देख सकते। गायों का पेट भरने के लिए जब लोगों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए तो हमने लोगों के सामने हाथ फैलाना शुरू किया। हाथ फैलाने के बावजूद लोगों ने दान नहीं दिया। हां कुछ लोगों ने ब्याज पर कर्ज देने की बात जरूर कही। मजबूरी में कुछ ब्याज पर कर्ज लिया और कुछ बैंक से। अब आश्रम पर ढाई करोड़ का कर्ज है।

नगर निगम और पुलिस भी इन्हीं के भरोसे
यूं तो नगर निगम के पास कैटिल कैचिंग दस्ता और आवारा जानवरों के लिए उनकी खुद की गौशाला होनी चाहिए, लेकिन हल्द्वानी नगर निगम के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं। तो नगर निगम के पकड़ी गायें भी आश्रम में आती हैं। इसके बाद कसाइयों से जो गाये पुलिस बरामद करती है तो उन्हें भी यहीं रखा जाता है। कोई कोर्ट में याचिका लगाता है तो उन गायों का ठिकाना भी यहीं है।

अकेले गौरव नहीं भर पाएंगे 12 सौ गौ माताओं का पेट
नैनीताल जिले के हल्द्वानी स्थित गौलापार निवासी गौरव ए-वन इंडस्ट्री के मालिक हैं और गौ प्रेमी हैे। गौरव को जब आश्रम के बारे में पता चला तो उन्होंने आश्रम को आर्थिक सहायता देनी शुरू की। इसके साथ ही उन्होंने बीमार गायों के लिए दवाइयां भी उपलब्ध कराई। अब यह गौरव की आदत में शुमार हो चुका है। हर माह गौरव गऊ मां के लिए समय से अपना कतव्र्य निभा रहे हैं।

लोगों को जागरुक कर रहीं समाजसेवी मंजू भट्ट
समाजसेवी मंजू भट्ट लंबे समय से सरकार और प्रशासन से गायों के लिए कुछ बेहतर करने की अपील करती आ रही हैं। हाल ही में उन्होंने कुमाऊ कमिश्नर को पत्र लिखकर नगर निगम के अधीन एक गौशाला बनाने का सुझाव दिया था। इसको लेकर कुमाऊ कमिश्न ने नगर निगम को जमीन तलाशने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन नगर निगम की ओर से इस मामले में स्थिलिता दिख रही है।

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