दिल्ली, डीडीसी। हाईकोर्ट ने कहा था कि अर्णब को सलाखों के पीछे रहकर पुलिस के सवालों का जवाब देना होगा। इस मामले अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने ना सिर्फ अर्णब को जमानत दी, बल्कि राज्य सरकार पर तल्ख टिप्पणी भी की।
इंटीरियर डिजाइनर और उनकी मां की आत्महत्या के मामले में उकसाने के आरोपी रिपब्लिक टीवी के चीफ एडिटर अर्णब गोस्वामी को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी। गोस्वामी और दो अन्य आरोपियों नीतीश सारदा और प्रवीण राजेश सिंह को 50-50 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड पर जमानत मिली है। अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि इस तरह से किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत आजादी पर बंदिश लगाया जाना न्याय का मखौल होगा। जस्टिस धनंजय वाई. चंद्रचूड और जस्टिस इन्दिरा बनर्जी की बेंच ने कहा कि अगर राज्य सरकारें लोगों को निशाना बनाती हैं तो उन्हें इस बात का अहसास होना चाहिए कि नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट है। सुप्रीम कोर्ट ने ने कहा कि राज्य सरकारें कुछ लोगों को विचारधारा और मत भिन्नता के आधार पर निशाना बना रही है। अर्नब गोस्वामी की अंतरिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा, ‘हम देख रहे हैं कि एक के बाद एक ऐसे मामले हैं जिसमें हाई कोर्ट जमानत नहीं दे रहे हैं और वे लोगों की स्वतंत्रता, निजी स्वतंत्रता की रक्षा करने में नाकाम हो रहे हैं।’ कोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि क्या गोस्वामी को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की कोई जरूरत थी, क्योंकि यह व्यक्तिगत आजादी से संबंधित मामला है। बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र असाधारण तरीके से लचीला है और महाराष्ट्र सरकार को इन सबको नजरअंदाज करना चाहिए। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘उनकी जो भी विचारधारा हो, कम से कम मैं तो उनका चैनल नहीं देखता, लेकिन अगर सांविधानिक न्यायालय आज इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा तो हम निर्विवाद रूप से बर्बादी की ओर बढ़ रहे होंगे।’ कहा कि, सवाल यह है कि क्या आप इन आरोपों के कारण व्यक्ति को उसकी व्यक्तिगत आजादी से वंचित कर देंगे?’ न्यायालय ने कहा, ‘अगर सरकार इस आधार पर लोगों को निशाना बनायेंगी…आप टेलीविजन चैनल को नापसंद कर सकते हैं…. लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए।’

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