– उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में दे चुका है दर्जनों वारदातों को अंजाम

हल्द्वानी, डीडीसी। वो हाईस्कूल फेल था, लेकिन खाकी की शागिर्दगी में था। इस शागिर्दगी में उसने गुनाह के कई पैंतरे सीखे और मझा हुआ अपराधी बन गया। इन पैंतरों में एक पैंतरा था सम्मोहन ठगी। इस सम्मोहन के जरिये हाईस्कूल फेल शातिर अपराधी ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में दर्जनों लोगों को अपना शिकार बना डाला। हालांकि ज्यादा दिन तक शातिर पुलिस की गिरफ्त से दूर नही रह सका और अपने एक और शातिर दोस्त के साथ धर लिया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को कठघरिया पनयानी स्थित हैड़ाखान मंदिर के पास से गिरफ्तार कर लिया। मामला उत्तराखंड में नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर का है।

6 महीने पहले ही आया था सलाखों से बाहर
इस शातिर अपराधी का नाम है विनोद कुमार शर्मा पुत्र सम्पूर्णानंद शर्मा और ये राजनगर पीएसी 38 बटालियन गेट देव सैनी थाना हरदूवागंज जनपद अलीगढ़ यूपी का रहने वाला है। जबकि दूसरा आरोपी कालीचरण पुत्र रामचन्द्र निवासी डोहरिया थाना बिथरी चैनपुर जिला बरेली यूपी का रहने वाला है। दोनों देहरादून की जेल में बंद थे और एक ही बैरक में थे। छह माह पहले दोनों आजाद हुए तो पक्के दोस्त बन गए और संग वारदातों को अंजाम देने में जुट गए।

पुलिस वाला बनना चाहता था आरोपी
रविवार को एसपी सिटी डा. जगदीश चन्द्रा ने बताया कि विनोद के परिवार में कुछ लोग उत्तर प्रदेश पुलिस में नौकरी करते है और इन्हीं लोगों की संगत में रहकर विनोद ने ठगी के गुर सीख लिए। वह खुद भी पुलिस में भर्ती होना चाहते थे, लेकिन पढ़ाई आड़े आ गई। जिसके बाद इसने वारदातों को अंजाम देना शुरू किया। आरोपी लोगों से मिलता और बातों ही बातों में उनसे जान पहचान निकाल लेता। बाते इतनी लच्छेदार होती कि सामने वाला मंत्रमुग्ध हो जाता। इसी के बूते उसने कइयों को ठगा। इसे सम्मोहन करना भी कहा जा सकता है।

पैर छुए और लूट लिया प्रमोद को
बीती 19 जनवरी को जगत मंगला कालोनी ऊंचापुल मुखानी निवासी डा. प्रमोद चन्द्र गुरूरानी पुत्र जगदीश चन्द्र गुरूरानी अपने घर के बाहर टहल रहे थे। तभी शातिर बाइक पर सवार होकर पहुंचे मुलाकात होते ही आरोपी ने लच्छेदार बातें शुरू की प्रमोद के पैर छू लिए। उसने प्रमोद के पहने जेवरों की तारीफ की और कहा कि उसे ऐसे ही जेवर अपने बेटे के लिए बनाने है। एक सेल्फी लेने के बहाने इन लोगों ने प्रमोद से उसके जेवर उतरवा लिए और फरार हो गए।

90 सीसीटीवी खंगाले तब गिरफ्त में आए
विनोद और कालीचरण को पकड़ने के लिए पुलिस ने तत्परता जरूर दिखाई, लेकिन उन्हें पकड़ना आसान नहीं था। पुलिस आरोपियों के चेहरों से अंजान थी। इसके लिए घटना स्थल के आस-पास लगे सीसीटीवी को खंगाले गए और रणनीति कामयाब हुई। आरोपियों के चेहरे साफ हुए और सीसीटीवी खंगालते-खंगालते पुलिस के हाथ आरोपियों के गिरेबां तक जा पहुंचे। इसके लिए पुलिस ने एक, दो नहीं बल्कि 90 सीसीटीवी फुटेज खंगाले।

जेल में है अपराधी का शागिर्द बेटा
विनोद घटना को अकेले अंजाम नहीं देता था। उसके हर जुर्म में उसका बेटा विवेक शर्मा भी शरीक था। विनोद लोगों को अपने जाल में फंसाता और शिकार फांसने में बेटा विवेक उसके साथ रहता। गुरु पिता की शागिर्दगी में शागिर्द बेटा विवेक भी गुरु बन चुका था। इन करतूतों का अंजाम फिलहाल विवेक भुगत रहा है और वह उत्तर प्रदेश की मेरठ जेल में बंद है।

जहां भी रहा पुलिस वाला बनकर रहा
आरोपी जहां भी रहता था, वह खुद को उत्तर प्रदेश पुलिस में तैनात बताता था। ये सिर्फ इसलिए कि कोई उस पर शक ना करे और रौब बरकरार रहे। उसने अपनी बाइक पर भी यूपी पुलिस का लोगो छपवा रखा था। आरोपी पिछले 35 सालों से वारदातों को अंजाम देता आ रहा है। इस दौरान उसने यूपी के कानपुर, बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, मथुरा, आगरा, संभल, सहारनपुर तथा उत्तराखंड के काशीपुर, हरिद्वार, देहरादून व हल्द्वानी में दर्जनों वारदातों को अंजाम दिया।

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