– हाकम ने पार कराई उम्र की सीमा, बीए और इंटर की फर्जी मार्कशीट से दरोगा बन गए जालसाज

हल्द्वानी, डीडीसी। जगजीत सिंह की एक बेहद खूबसूरत गजल हर किसी ने गुनगुनाई होगी… न उम्र की सीमा हो, न जन्म का हो बंधन और आजकल ये गजल दरोगा भर्ती घोटाले के जालसाजों पर सटीक बैठ रही है। मसलन, न उम्र की सीमा थी, न असली डिग्री का बंधन और यही हुआ दरोगा भर्ती में। हाकम की मेहरबानी ने कइयों के उम्र के बंधन सीमा खत्म कर दी और तमाम के लिए असली डिग्री का बंधन खत्म कर दिया।

बता दें कि वर्ष 2015-16 में हुई दरोगा भर्ती की परीक्षा पंतनगर विश्व विद्यालय में आयोजित कराई थी, लेकिन विद्यालय प्रशासन ने भर्ती से जुड़ा अहम सुबूत ओएमआर शीट जलाकर राख कर दी। हालांकि विजिलेंस ने राख से सुबूत तलाश निकाले। विजिलेंस ने दरोगा भर्ती घोटाले की जांच और रिपोर्ट शासन को सौंपी। शासन के निर्देश पर भर्ती हुए 20 दरोगाओं की पहली खेप को एक साथ सस्पेंड कर दिया गया।

अब विजिलेंस से जुड़े सूत्रों की मानें तो इन सभी पर कार्रवाई जलाई गई ओएमआर शीट के बूते नहीं की गई। बल्कि विजिलेंस ने सबसे पहले भर्ती हुए कुल 339 दरोगाओं के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच शुरू की। पिछली खबर में हमने दरोगाओं के प्रमाण पत्रों का जिक्र करते हुए बताया था कि दरोगाओं ने फर्जी प्रमाण पत्रों के बूते वर्दी हासिल की। इसमें कई दरोगा ऐसे भी हैं, जिनके कॉलेज तक का पता नहीं था। अब इस मामले में एक नया तथ्य सामने आया है।

सूत्र बता रहे हैं कि कुमाऊं में तैनात रहे चार दरोगा ऐसे हैं, जिन्होंने न सिर्फ फर्जी प्रमाण पत्रों से नौकरी हासिल की, बल्कि हाकम और पैसों की माया के बूते बढ़ी उम्र भी आड़े आने नहीं दी। इन्हीं दरोगाओं में से दो दरोगा ऐसे हैं, जिन्होंने दरोगा बनने के लिए बीए की फर्जी मार्कशीट का इस्तेमाल किया। जबकि एक दरोगा ऐसा है, जिसके इंटर की मार्कशीट को असली है, लेकिन जिस स्कूल से उसने मार्कशीट हासिल की, वो मान्यता प्राप्त संस्थान नहीं है। सीधे तौर पर कहा जाए तो यह भी फर्जी है। जबकि चौथे दरोगा ऐसा था, जो उम्र के लिहाज के दरोगा बनने के लायक नहीं था। यानि वो तय उम्र सीमा 28 वर्ष पार कर चुका था, बावजूद इसके वो दरोगा बन गया।

फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र वालों की बलि चढ़ना तय
हल्द्वानी : विजिलेंस के राडार पर सभी 339 दरोगा हैं और इन सभी की जांच में लंबा वक्त भी लग सकता है, लेकिन प्राथमिक जांच में सामने आए पहले 20 दरोगाओं की नौकरी बचना बेहद मुश्किल है। खास तौर पर वह दरोगा, जांच में जिनकी प्रमाण पत्र फर्जी निकले हैं या फिर अन्य वजहों से वह भर्ती के लायक नहीं थी, मसलन उम्र का कम या ज्यादा होना। माना जा रहा है कि ऐसे दरोगाओं की बलि चढ़ना तय है।

सवालों के घेरे में है पूरी की पूरी दरोगा भर्ती परीक्षा
हल्द्वानी : विजिलेंस की जांच और प्राथमिक जांच में 20 दरोगाओं के नाम सामने आने के बाद तमाम चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग अब पूरी भर्ती पर ही सवालिया निशान लगा रहे हैं। इस भर्ती के वेटिंग लिस्ट वाले व अन्य कारणों से बाहर हुए लोगों के कयास हैं कि सभी ने जोर-जुगाड़ लगाकर नौकरी हासिल की और जो काबिल थे उन्हें नाकाबिल लोगों की वजह से बाहर कर दिया गया। ऐसे में दोबारा भर्ती कराई जानी चाहिए।

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