– ग्रीन इंडस्ट्री से ज्वेलर्स इंडस्ट्री बाहर, अब PBC की NOC जरूरी

देहरादून, डीडीसी। ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए ये खबर जरूरी है। जरूरी इसलिए है क्योंकि ये इंडस्ट्री अभी तक प्रदूषण नियमों से बाहर थी, लेकिन अब सुनारों को अपनी दुकान बचाने के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास करने होंगे और करना ये होगा कि अब शटर उठाने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति लेनी होगी। सीधे शब्दों में कहा जाए तो ज्वेलरी उद्योग अभी तक ग्रीन इंडस्ट्री के दायरे में आती थी, लेकिन अब ऐसा नही है। अब ज्वेलरी इंडस्ट्री भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दायरे में होगी।

परख, हॉलमार्किंग और निर्माण वाले होंगे दायरे में
फिलहाल अभी जो खबर आई है, उसके मुताबिक सोने को परखने वाले, हॉलमार्किंग करने वाले और आभूषण या निर्माण से जुड़े काम करने वालों को ज्वेलर्स को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी (PCB) के दायरे में लिया गया है। अब उक्त सभी कामों से जुड़े लोगों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से (NOC) लेना जरूरी होगा।

गाइड लाइन तैयार, जल्द कुछ और फैसले
आपको बता दें कि ये पूरी की पूरी कार्यवाही नेशलन ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देश पर की जा रही है। अभी तक तो यही माना जा रहा था कि ज्वेलरी इंडस्ट्री से किसी भी तरह का प्रदूषण नही होगा। जबकि ऐसा था नही। इस मामले पर एनजीटी की लंबे समय से निगाह थी। जिसके बाद एनजीटी इस अहम फैसले पर पहुंचा और अब इसके लिए गाइड लाइन भी तैयार कर ली है। हालांकि अभी इस मामले में कुछ और फैसले लेने बाकी हैं, जो जल्द लोगों के सामने होंगे।

शिकायतों पर फैसला, तय होगा शुल्क
आपको बता दें कि एनजीटी ने ये फैसला एक दिन में नही लिया, बल्कि इसमें लम्बा वक्त लगा है। बताया जाता है कि एनजीटी को इस मामले में तमाम शिकायतें मिलीं और शिकायतों में ये कहा गया कि ज्वेलरी के काम से भी बड़े स्तर पर प्रदूषण हो रहा है। इसको लेकर शिकायतकर्ताओं ने कुछ ठोस तथ्य भी रखे। जिसके बाद एनजीटी हरकत में आया और अपनी जांच में पाया कि सोने के निर्माण, परख और हॉलमार्किंग आदि करने में कई तरह के केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ लैड और धातु की गुणवत्ता परखने के लोए एक्सरे मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिससे प्रदूषण फैल रहा है। अब ये भी बताया जा रहा है कि अगली बोर्ड बैठक में संचालन शुल्क और अन्य मसलों पर भी फैसला होगा।

हल्द्वानी, हरिद्वार, दून और उधमसिंहनगर को निर्देश
एनजीटी के निर्देश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सभी राज्य बोर्डों को सोने का काम करने वाले ज्वेलर्स को प्रदूषण के दायरे में लाकर प्रदूषण नियंत्रण के निर्देश दिए गए हैं। जिसके बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी हल्द्वानी, क्षेत्रीय अधिकारी हरिद्वार, क्षेत्रीय अधिकारी उधमसिंहनगर और क्षेत्रीय अधिकारी देहरादून को इसकी गाइडलाइन जारी करते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

ये होंगी कुछ जरूरी गाइडलाइन
सभी को पीसीबी से एनओसी लेनी होगी।

इस काम में लगे कर्मचारियों का साल में एक बार ब्लड टेस्ट कराना होगा।

सारी केमिकल या अन्य पदार्थों के उपयोग और डिस्पोजल का रिकार्ड रखना होगा।

कर्मचारियों को एसिड ग्लब्ज और हेलमेट सहित सुरक्षा उपकरण देने होंगे।

काम की जगह में धुआं निकलने के लिए विशेष चिमनी लगानी होगी।

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