लखनऊ, डीडीसी। उत्तर प्रदेश के जिला कानपुर के बिकरू कांड से पूरे देश में मशहूर हुए कुख्यात बदमाश विकास दुबे अपराध जगत की बुलंदियों पर यूं ही नही पहुंचा। बल्कि इसके पीछे उन 80 पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का हाथ है, जिनकी गर्दन अब फंस चुकी है। इन अधिकारियों के बूते ही विकास दुबे अवैध तरीके से 150 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति जमा कर डाली। एसआईटी ने इतनी बड़ी संपत्ति की जांच प्रवर्तन निदेशालय से कराए जाने की सिफारिश की है। साथ ही जांच में दोषी पाए गए अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई को कहा है।
गत दो-तीन जुलाई की आधी रात कानपुर के बिकरू गांव में दुबे को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर गैंगस्टर के गुर्गों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई। इस दिल दहला देने वाली वारदात में एक क्षेत्राधिकारी और एक थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिसकर्मी मारे गए। जबकि पांच पुलिस वाले, एक होमगार्ड और एक आम नागरिक घायल हुआ। इस मामले में 12 जुलाई को एसआईटी ने जांच शुरू की थी। तीन सदस्यीय एसआईटी की जांच रिपोर्ट में 80 से अधिक पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मियों को दोषी पाया गया है। रिपोर्ट के 700 पन्ने मुख्य हैं, जिनमें दोषी पाए गए अधिकारियों व कर्मियों की भूमिका के अलावा करीब 36 संस्तुतियां शामिल हैं। पूरी रिपोर्ट 100 से ज्यादा गवाहों के आधार पर तैयार की गई है। 9 बिंदुओं को आधार बना कर की गई जांच 20 अक्टूबर को पूरी हुई। हालांकि जांच रिपोर्ट 30 जुलाई को ही मुख्यमंत्री को सौंपी जानी थी। रिपोर्ट में विकास दुबे द्वारा अवैध तरीके से हासिल की गई 150 करोड़ रुपये की संपत्ति की प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में उन करीब 80 पुलिसवालों और प्रशासनिक अफसरों का भी जिक्र है, जिन्होंने न सिर्फ इस संपत्ति को जुटाने बल्कि अपराध जगत में जड़े जमाने और अपराध को छिपाने में मदद की। रिपोर्ट में कहा है कि दुबे और उसके गैंग की मदद करने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए। इसकी सबसे बड़ी वजह जांच रिपोर्ट में बताई गई है। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि विकास दुबे को मुखबिरी के चलते पहले से ही पुलिस की दबिश के बारे में जानकारी मिल गई थी।

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