मॉस्को, डीडीसी। रात पिता बेसुध गहरी नींद में सो रहा था, तभी तीन बहनों कमरे में दाखिल होती हैं। एक के हाथ में चाकू, दूसरे के हाथ में हथौड़ा और तीसरे के हाथ में लाल मिर्च पाउडर। इससे पहले कि बाप को बेटियों के कमरे में होने का एहसास हो पाता, तीनों बेटियों ने एक साथ हमला कर दिया। एक के बाद एक चाकू के 30 वार किये, हथौड़ा चलाया और लहूलुहान तड़पते पिता पर लाल मिर्च डाल कर और दर्द दिया। बाप तड़प-तड़प कर मर गया। करीब तीन साल बाद तीनों बहनों को बमुश्किल कोर्ट से जमानत पर रिहा किया गया और वह भी कड़ी शर्तों के साथ।

मिचैल खचातुर्यन मॉस्को में अपनी तीन बेटियों एंजेलिना, मारिया और क्रिस्टिना के साथ रहता था, लेकिन पत्नी साथ नहीं रहती थी। वजह बताते हैं कि मिचैल बहुत क्रूर था। बताया तो यह भी जाता है कि मिचैस अपनी बेटियों के प्रति भी बहुत क्रूर था। वह बेटियों को घर में ही कैद रखता और तरह-तरह से शारीरिक और मानसिक प्रताडऩा देता था। बेटियां शायद यह सबकुछ सह जातीं, लेकिन इस प्रताडऩा के बाद बाप उनका यौन उत्पीडऩ करता था और यह सब बेटियों को बर्दाश्त नहीं होता था। घटना के वक्त क्रिस्टिना 19, एंजेलिना 18 और मारिया 17 साल की थी। कत्ल का वाक्या 27 जुलाई वर्ष 2018 का है। पिता से तंग बेटियां बाप को जान से मारने का मन बना चुकी थी, बस वह इंतजार कर रही थी कि कब उनका पिता सोए और वह उनका काम तमाम कर सकें। देर रात जब मिचैल सो गया तो तीनों बेटियां चुपके से कमरे में दाखिल हुईं। एक के हाथ में चाकू, दूसरे के हाथ में हथौड़ा और चौथे ने लाल मिर्च का पाउडर ले रखा था। सोते वक्त ही बेटियों ने बाप पर ताबड़तोड़ हमले कर दिये। लहूलुहान बाप तड़प रहा था और तभी एक बेटी ने जख्म पर लाल मिर्च का पाउडर डाल कर उसे और तड़पाया। तीनों ने तड़पा-तड़पा कर बाप को बेदर्दी से मौत की नींद सुला दिया। कत्ल के पीछे एक वजह यह भी सामने आई कि वारदात की रात ठीक पहले पिता ने तीनों बेटियों को एक-एक कर सिर्फ इसलिए फटकार लगाई थी कि क्योंकि वह फ्लैट में हुई सफाई से खुश नहीं था।

कत्ल किया और खुद किया पुलिस को फोन
ऐसा नहीं हुआ कि पूरी वारदात को अंजाम देने के बाद बाप के कत्ल की आरोपी बेटियां मौके से भाग निकलें। बल्कि पिता की मौत की तसल्ली हो जाने के बाद उन्होंने खुद पुलिस को फोन किया और वारदात की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों को हिरासत में ले लिया। इस मामले ने रूस में खूब तूल पकड़ा। लाखों लोग लड़कियों के समर्थन में सडक़ों पर उतर आए। मानवाधिकार भी इस मामले में आगे आया और लड़कियों को आरोपी की जगह पीडि़त समझने की कोर्ट से गुहार लगाई।

जमानत मिली, लेकिन कड़ी शर्तों के साथ
इस मामले में रूस का एक बड़ा तबका आरोपी लड़कियों के पक्ष में है। प्रदर्शनकारी लड़कियों को दोष मुक्त किए जाने की मांग कर रहे हैं। लड़कियों को समर्थन इस कदर मिला कि रूस में कानून बदलने तक की मांग उठने लगी। बहरहाल, कोर्ट ने तीनों लड़कियों को जमानत पर रिहा कर दिया है, लेकिन कड़े नियमों के साथ। कोर्ट ने कहा कि जमानत पर बाहर रहने के दौरान तीनों बहनें न तो एक दूसरे से मिलेंगी और न ही बात करेंगी। इतना ही नहीं तीनों को मीडिया से भी दूरी बनाए रखने के लिए कहा गया है।

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