– यहां अलग है खड़ी होली, बैठकी होली और महिला होली के रंग

नैनीताल, डीडीसी। भारत का रंग-बिरंगा त्योहार होली (Holi 2021) और ये होली का रंग ऐसा कि कोई इससे अछूता नही रह पाता। अलग-अलग भाषा, वेशभूषा, परंपरा और संस्कृति वाले देश भारत में होली के रंग भी अलग-अलग हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं (Kumaon) में तो ये रंग बिल्कुल ही अलग है। कुमाऊं की खड़ी और बैठकी होली का अलग ही रंग है। ढोल और रागों के रंग से रंगी और गौरवशाली इतिहास समेटे होली के बारे में आपको भी जानना चाहिए।

पहाड़ी होली का 400 साल पुराना इतिहास
कुमाऊं की वादियां होलियों के जरिए इतिहास को भी समेटे हैं। कहा जाता है कि होली का इतिहास 400 साल से भी ज्यादा पुराना है जिसमें ढोल की थाप पर पांव व हाथों की चहल कदमी होती है। खड़ी होली का गायन पक्ष भी काफी मजबूत है। इसमें राग दादरा और राग कहरवा में गायन होता है तो इस दौरान राधा कृष्ण, राजा हरिशचन्द्र और श्रृवण कुमार के साथ महाभारत और रामायण काल की गाथाओं का वर्णन होता है। खड़ी होली के होल्यार लोक नृत्य के साथ खूब मस्ती और धूम के मचाने के साथ सामाजिक संदेश भी है। इसमें ऋतु वर्णन के साथ वीर रस से योद्धाओं का भी वर्णन किया जाता है।

पहाड़ तीन रूपों में मनाता है होली
पहाड़ में होली की तीन रुप हैं। मसलन बैठकी होली, महिला होली और खड़ी होली। बैठकी होली पौष के पहले हफ्ते से शुरू हो जाती है, जो भक्ति रस से शुरू होकर समय के साथ बदलती रहती है। बसंत पंचमी से बैठकी होली अपने श्रंगार रस में तब्दील होती है और शिवरात्रि के बाद ये रंगों में रंग जाती है। महिलाएं भी घरों में होली का आयोजन करती हैं।

चीर बंधन के साथ शुरू होती है खड़ी होली
इससे बिल्‍कुल अलग है खड़ी होली। चीर बंधन के साथ खड़ी होली शुरू होती है और कुमाऊं में काली कुमाऊं, चम्पावत, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और नैनीताल में इसका खूब आयोजन होता है। ग्रामीण इलाकों में खेली जाने वाली इस होली की शुरुआत गांव के मन्दिर से होती है। जिसके बाद हर घर में जाकर होली गायन होता है और परिवार के लोगों को आशीष दिया जाता है जो छलड़ी यानी होली के दिन तक चलता रहता है।

होली और सौहार्द की मिसाल नैनीताल
नैनीताल सौहार्दपूर्ण होली की मिसाल है। हिंदुओ का प्रमुख त्योहार होली यहां हिन्दू-मुस्लिम मिलकर मनाते हैं और ये सिलसिला पिछले 25 सालों से अनवरत जारी है। यकीनन जहां एक ओर हमेशा देश को जाति, धर्म में बांटने की कोशिश होती है, वहीं नैनीताल ऐसी कुंठित मानसिकता वाले लोगों में मुंह पर करारे तमाचे जैसा है।

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