इटावा, डीडीसी। वो साथ काम करता था और काम करते-करते दोनों के बीच कब मोहब्बत हो गई उसे पता ही नहीं लगा। उसे तो यह भी याद नहीं रहा कि उसका एक पति और पांच बच्चे हैं। अपने प्रेमी के लिए उसने सब कुछ दांव पर लगा दिया और किया भी ऐसा ही। एक रोज वह पति और पांच बच्चों को छोड़ कर अपने प्रेमी के साथ फुर्र हो गई, लेकिन इस मोहब्बत की उसे भारी कीमत अदा करनी पड़ी। प्रेमी के साथ भागने के कुछ ही दिन बाद उसकी लाश एक नहर किनारे पूरी तरह जली मिली और इन सबके बाद प्रेमी फरार था। प्रेमिका के कत्ल का आरोप प्रेमी पर है और कटघरे में पुलिस की कारगुजारी। मामला उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से जुड़ा है।
इटावा के कुईया सैफई निवासी राजेंद्र कुमार ईंट भट्टे पर काम करता है। उसके साथ उसकी पत्नी गीता देवी भी भट्टे पर काम करती है और इनके पांच बच्चे हैं। इसी भट्टे पर सौरभ पुत्र प्रहलाद भी काम करता था और वह बहादुरपुर लोहिया में रहता है। बताया जाता है कि काम करने के दौरान ही सौरभ और गीता देवी की पहचान हुई और यह पहचान जल्द ही मुलाकातों में तब्दील हो गई। इन मुलाकातों में दोनों एक दूसरे के बेहद करीब आ गए। सौरभ और गीता के बीच चल रहे प्रेम-प्रसंग की चर्चा अब भट्टे पर होने लगी थी, लेकिन गीता का पति राजेंद्र इन सबसे बेखबर था। इससे पहले कि यह सब राजेंद्र के कानों तक पहुंचता गीता ने सौरभ के साथ भाग जाने की योजना तैयार कर ली। एक रात जब पांचों बच्चे और पति सो रहे थे, तभी गीता चुपके से घर से निकली और सौरभ के साथ फरार हो गई। इस घटना की जानकारी अगले ही दिन राजेंद्र ने पुलिस को दी और आरोप लगाया कि सौरभ ने अपने एक दोस्त की मदद से उसका अपहरण कर लिया है। पुलिस ने इस मामले पर ध्यान नहीं दिया और इसे प्रेम-प्रसंग मान कर राजेंद्र को चलता कर दिया। कुछ दिनों बाद अचानक राजेंद्र के पास बहादुरपुर गांव से फोन आया और उसने राजेंद्र को बताया कि तुम्हारी पत्नी को सौरभ ने नहर किनारे फूंक दिया है। खबर मिलते ही राजेंद्र अपने लोगों के साथ मौके पर जा पहुंचा और वाकई नहर किनारे पूरी तरह जल चुकी लाश पड़ी थी। इस बीच खबर पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई, लेकिन सौरभ का कहीं पता नहीं था।

पहले जहर खाया, फिर सौरभ ने जलाया
मामले में राजेंद्र का आरोप है कि गीता अपनी मर्जी से सौरभ के साथ नहीं गई थी, बल्कि सौरभ ने उसका अपहरण किया था। जब गीता सौरभ के चंगुल से आजाद नहीं हो सकी तो उसने जहर खा लिया। जिसके बाद सौरभ ही गीता को लेकर पास से अस्पताल गया, लेकिन हालत नाजुक होने पर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। हायर सेंटर में इलाज के दौरान गीता की मौत हो गई। जिसके बाद सौरभ लाश लेकर वापस गांव गया और रात के अंधेरे में नहर किनारे शव फूंकने के बाद मौके से फरार हो गया। बहरहाल, राजेंद्र के आरोपों में दम हो न हो, लेकिन अगर पुलिस समय रहते कुछ करती तो शायद ये न होता।

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