– मंत्री ने खत में लिखा, बेहद चिंताजनक है सवास्थ्य व्यवस्था

भरत गुप्ता, डीडीसी (लखनऊ)। क्या कहिएगा जब सरकार का मंत्री ही लाचारी बयां करने लगे। क्या कहिएगा कि जब उसकी अपनी सरकार में सुनवाई न हो। फिर क्या कहिएगा जब उत्तर प्रदेश के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक के फोन पर एक एम्बुलेंस तक मुहैया न हो सके और पद्मश्री सम्मान से नवाजे जाने वाले एक शख्स को तड़प-तड़प कर जान गंवानी पड़ जाए। इन सबके बाद कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, उप्र शासन, लखनऊ व प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा, उप्र शासन, लखनऊ को एक अति गोपनीय पत्र लिखा। अब ये पत्र dakiyaa. com के पास है और इस खत को पढ़कर आपके होश भी फाख्ता हो जाएगा। इस मामले में dakiyaa के यूपी हेड भरत गुप्ता ने कानून मंत्री पाठक का पक्ष जानने के लिए उनसे सम्पर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनकी अपनी सरकार और कारिंदों के प्रति इतनी नाराजगी है कि वो अपने तीनों मोबाइल नम्बर बंद करके बैठे है। बहरहाल, अब नीचे आप जो कुछ पढ़ेंगे, उसके एक-एक शब्द कानून मंत्री के लिखे हैं। बाकी खत पढ़ने के बाद हम तो इतना ही कहेंगे कि मास्क और दो गज की दूरी है बहुत जरूरी।

“अत्यंत कष्ट के साथ सूचित करना पड़ रहा है”
ब्रजेश पाठक ने लिखा, अत्यन्त कष्ट के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि वर्तमान समय में लखनऊ जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं का अत्यन्त चिन्ताजनक हाल है। विगत एक सप्ताह से हमारे पास पूरे लखनऊ जनपद से सैकड़ो फोन आ रहे है। जिनको हम समुचित इलाज नहीं दे पा रहे है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में फोन करने पर फोन का उत्तर नहीं दिया जाता था, जिसकी शिकायत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मन्त्री एवं अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग, उप्र शासन से करने के उपरान्त अब फोन तो उठता है, किन्तु सकारात्मक कार्य नहीं होता। कोरोना पेशेन्ट्स की जांच रिपोर्ट मिलने में 4 से 7 दिवस का समय लग रहा है।

“4 से 6 घंटे लग जाते हैं एम्बुलेंस मिलने में”
एम्बुलेन्स भी पेशेन्ट्स को समय से नहीं मिल पा रही है तथा फोन पर बुलाने पर 5 से 6 घण्टो में एम्बुलेन्स पहुँच रहीं है। सी.एम.ओ. आफिस से भर्ती की स्लिप मिलने में दो-दो दिनों का समय लग रहा है। ऐसी असन्तोषजनक स्थिति के दृष्टिगत विगत 8 तारीख को मै स्वयं मुख्य चिकित्साधिकारी के कार्यालय जा रहा था, किन्तु अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य द्वारा फोन पर दिये गये आश्वासन के दृष्टिगत मै उनके कार्यालय नहीं गया, हॉलाकि अद्यतन तिथि तक किसी भी प्रकार से स्थिति संतोषजनक नहीं हुयी है।

मंत्री के फोन पर भी नही आई एम्बुलेंस और पद्मश्री विजेता की मौत हो गई
कानून मंत्री पाठक ने खत में आगे लिखा कि आज मेरी विधानसभा क्षेत्र के पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त डॉ योगेश प्रवीण की अचानक तबियत बिगड़ गयी। जिसकी सूचना मिलने पर मैने स्वयं मुख्य चिकित्सा अधिकारी से फोन पर बात की एवं उन्हे तत्काल एम्बुलेंस तथा चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का अनुरोध किया, किन्तु खेद का विषय है कि कई घण्टो के उपरान्त भी उन्हे एम्बुलेन्स नहीं मिल पायी एवं समय से चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाने के कारण उनका निधन हो गया।

अस्पतालों में बेड कम, प्राइवेट पैथोलॉजी में जांच बंद
वर्तमान कोविड-19 जनित परिस्थितियों में जबकि प्रतिदिन 4 से 5 हजार कोरोना के रोगी जनपद में मिल रहे है, ऐसे में कोविड अस्पतालों में बेड संख्या अत्यधिक कम है। लखनऊ में प्राइवेट पैथोलॉजी सेन्टरों में कोविड की जाँच बन्द करा दी गयी है। सरकारी अस्पतालों में कोविड की जाँच में कई दिनों का समय लग रहा है चिकित्सा विभाग के एक बड़े अधिकारी से एक सप्ताह पूर्व मेरी बात हुयी थी, जिन्होने मुझे बताया कि उन्हें प्रतिदिन 17000 किट जांच हेतु चाहिए किन्तु मात्र 10000 जांच किट ही उन्हें उपलब्ध हो पा रही है। उपरोक्त वर्णित वस्तुस्थिति के परिप्रेक्ष्य में मेरा अनुरोध है कि कोविड अस्पतालों में कोविड के मरीजो हेतु बेड की सख्या बढाई जाये, कोविड जॉच की संख्या बढ़ाई जाये एवं पर्याप्त जांच किट उपलब्ध करायी जाये।

ये है कानून मंत्री की मांग
प्राइवेट अस्पतालों, संस्थानों एवं पैथालॉजी को कोविड जाँच का पुनः अधिकार दिया जाये। पूर्व की भॉति कोविड के रैण्डम टेस्ट शुरू किये जाये तथा आर.टी.पी. सी. आर. की जांच रिपोर्ट सम्बन्धित को 24 घण्टे के अन्दर पहले की तरह उपलब्ध करायी जाये आई.सी.यू. की संख्या बढ़ाई जाये एवं गम्भीर रोगियों को तुरन्त भर्ती करने की सुविधा प्रदान की जाये तथा कोविड रोगियों को लगने वाले रेमडेसिविर इन्जेक्शन को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जाये।

कोविड से इतर रोगियों की हालत और खराब
उक्त के अतिरिक्त जो रोगी कोविड के पेशेन्ट नहीं है अथवा जो हार्ट, किडनी, लीवर, कैन्सर, डायलसिस एवं अन्य गम्भीर रोगों से ग्रसित है, उनकी और भी अधिक दयनीय स्थिति है, क्योंकि कोविड पैनडेमिक के कारण उन्हें समय से उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है, ऐसे रोगियों को भर्ती किये जाने के इन्तजाम भी हमें गम्भीरता से देखना है। उपरोक्त कोविड जनित परिस्थितियों को यदि शीघ्र नियन्त्रित नहीं किया गया तो हमें कोविड की रोकथाम हेतु लखनऊ में लॉकडाउन लगाना पड़ सकता है।

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