– हल्द्वानी में वर्ष 2016 में अभियुक्तों ने की थी वारदात

हल्द्वानी, डीडीसी। दुष्कर्म में नाकाम होने के बाद हत्या के एक मामले में पांच साल बाद कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। मामले से जुड़े दोनों अभियुक्तों को द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह की कोर्ट ने विवाहिता की हत्या में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और 15-15 हजार जुर्माना लगाया। साथ ही शव छिपाने में तीन-तीन साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने मृतका के दोनों बच्चों को प्रतिकर दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए हैं।

घुमाने के बहाने मुखानी से बैठाया सूमो में
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि सात जुलाई 2016 को अभियुक्त जोगा राम उर्फ जग्गू निवासी दुपरौली बेरीनाग पिथौरागढ़ अपने साथी सह अभियुक्त मोहन राम निवासी ग्राम बना कांडा बागेश्वर के साथ अपने वाहन टाटा सूमो यूके 04 टीए 7483 में सवार थे। मुखानी चौराहे से उन्होंने दीपा पुत्री रंजीत राम निवासी बडयूडा देवराड़ी पंत गणाई गंगोली पिथौरागढ़ को घुमाने के बहाने सूमो में बैठा लिया।

भाखड़ा पुल के पास फेंकी लाश
वह कालादूंगी, रामनगर, बाजपुर होते हुए दीपा को काशीपुर ले गए। दोनों ने काशीपुर में शराब पी। वापसी के दौरान गडप्पू जंगल के पास दीपा लघुशंका के लिए उतरी तो दोनों ने उससे छेड़खानी शुरू कर दी और शारीरिक संबंध बनाने को कहा। जिसपर दीपा ने दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी दी। जिसके बाद दोनों ने गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी और शव को भाखड़ा पुल के पास फेंक दिया।

4 दिन बाद जंगल से मिली दीपा की लाश
11 जुलाई 2016 को वन बीट वॉचर गणेश राम ने शव की सूचना पुलिस को दी। घटना के 4 दिन बाद पुलिस को इसकी खबर मिली। शव की शिनाख्त कमलेश कुमार पुत्र रंजीत राम निवासी गणाई गंगोली पिथौरागढ़ ने अपनी बहन दीपा के रूप में की और थाना कालाढूंगी में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।

काठगोदाम में किराए पर बेटे के साथ रहती थी
कमलेश ने बताया कि दीपा अपने बेटे के साथ काठगोदाम में किराये पर रहती थी। दीपा के कमरे में जोगाराम का आना-जाना था। जोगाराम शिकायतकर्ता के पड़ोसी गांव दुपरौली का रहने वाला है। जिसके आधार पर जोगाराम व मोहन राम को गिरफ्तार किया गया। दोनों ने जुर्म इकबाल भी कर लिया था।

13 गवाह और मोबाइल लोकेशन से मिली सजा
अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने तथ्यों को साबित करने के लिए 13 गवाह पेश किए। मृतका व अभियुक्तगणों की कॉल डिटेल व मोबाइल लोकेशन के साक्ष्य पेश किए गए। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के प्रस्तुत गवाहों के साक्ष्य व सर्विलान्स के साक्ष्य को वैधानिक मानते हुए जोगा राम व मोहन राम को धारा 302 व 201 आईपीसी के मातहत दोषी करार दिया था।

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