– एक की मौके पर मौत, दूसरे होमगार्ड की हालत नाजुक

बिहार, डीडीसी। बिहार (Bihar) में शराब बंदी के बाद से शराब का अवैध कारोबार खूब फल-फूल रहा है। राजनीतिक छत्रछाया में पल रहे शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वो वर्दी वालों का कत्ल (Murder) करने से भी गुरेज नही करते। बिहार के पूर्णिया (Purniya) में शराब तस्करों ( Wine mafia) ने ऐसी ही दुस्साहसिक और दुर्दांत वारदात को अंजाम दे डाला। शराब से लदे वाहन को रोकने पर तस्करों ने बोलेरो कार दो होमगार्ड जवानों (Homegard) पर चढ़ा दी। कुचलने से एक गणेश पासवान की तो मौके पर मौत हो गई, जबकि दूसरे विद्यानंद कुमार को गंभीर हालत में सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

बंगाल की ओर से आ रही थी शराब
वारदात पूर्णिया के बायसी थाना क्षेत्र के दालकोला चेक पोस्‍ट की है। बताया जा रहा है कि बंगाल की ओर से शराब तस्‍कर बोलेरो में शराब लादकर दालकोला चेक पोस्ट की ओर आ रहे थे। तभी होमगार्ड गणेश और विद्यानंद ने उन्‍हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन शराब तस्‍कर रुके नही और तेज रफ्तार बोलेरो से दोनों जवानों को कुचल डाला।

बोलेरो हादसे का शिकार और तस्कर फरार
वारदात को अंजाम देने के बाद तस्कर शराब लदी बोलेरो को लेकर भाग जाना चाहते थे, लेकिन वो अपनी नीयत में कामयाब नही हो सके। बताया जाता है कि भागने के दौरान तेज रफ्तार बोलेरो गार्डर से टकराकर दुर्घटनाग्रस्‍त हो गई। जिसके बाद वो दोबारा स्टार्ट नही हुई। ऐसे में शराब तस्‍कर बोलेरो को मौके पर छोड़ कर फरार हो गया। पुलिस ने बोलेरो को बरामद कर लिया है।

अंधेरे में तीर चला रही बिहार पुलिस
बोलेरो से करीब 182 लीटर विदेशी शराब बरामद की गई है। इधर वारदात को अंजाम देने वाला शराब तस्कर मौके से फरार है। जिसकी तलाश में आसपास गहन तलाशी अभियान चलाया जा रहा, लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि पुलिस सारा खेल अंधेरे में खेल रही है। वजह कि पुलिस को अभी तक पता ही नही है कि वो तलाश कर किसकी रहे हैं। क्योंकि पुलिस के पास न तो कोई चेहरा है और न ही आरोपी का कोई नाम।

हजारों करोड़ का है शराब तस्करी का खेल
आपको गुजरात याद है, यहां भी शराब बंदी है और बिहार से पहले से। बावजूद इसके गुजरात में ना तो शराब की कमी है और न शराबियों की। आलम ये है कि शराब के काले कारोबारियों ने यहां होम डिलीवरी के जरिये शराब तस्करी शुरू कर दी है। आज ये कारोबार हजारों करोड़ का है। अब बिहार में भी माफिया यही खेल खेल रहे हैं और यहां भी खेल हजारों करोड़ के आसपास पहुंच चुका है। सूत्रों की माने तो सारा खेल राजनीति संरक्षण में खेला जा रहा है।

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