– आरोप, पुलिस को दिया था बार और रेस्त्रां से 100 करोड़ वसूली का टारगेट

मुम्बई, डीडीसी। महाराष्ट्र के बार और रेस्त्रां से 100 करोड़ वसूलने का इल्जाम झेल रहे महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख को आखिरकार कुर्सी छोड़नी पड़ गई। उन्होंने आज मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अपना स्तीफा सौंप दिया। आपको बता दें कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के पिछले दिनों गृह मंत्री पर 100 करोड़ रुपये की वसूली के सनसनीखेज आरोप आरोप लगाए थे। उन्होंने बाकायदा चिट्ठी लिखकर मुख्यमंत्री से शिकायत की थी।

इस्तीफे से पहले पावर के घर बैठक
अनिल देशमुख के इस्तीफा सौंपने से पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार के घर पर एक बैठक हुई। इस बैठक की वजह हाईकोर्ट के आदेश को माना जा रहा है। माना जा रहा था कि इस आदेश के बाद अनिल देशमुख से इस्तीफा लिया जा सकता है और हुआ भी ऐसा ही। सोमवार दोपहर तकरीबन 2 बजे उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया। बैठक में एनसीपी प्रमुख शरद पवार और डिप्टी सीएम अजित पवार और सुप्रिया सुले भी मौजूद थी।

पवार की सहमति के बाद सौंपा इस्तीफा
बैठक के दौरान लम्बी चर्चा हुई और जब शरद पवार इस्तीफे पर सहमत हुए, तब बैठक खत्म हुई। राज्य सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद अनिल देशमुख ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की। उन्होंने खुद पद से इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी। जिसपर शरद पवार ने सहमति दी और तय किया गया कि सरकार के लिए यह शर्मनाक होगा यदि गृह मंत्री को सीबीआई जांच के लिए बुलाया जाता है। मलिक ने कहा, अनिल देशमुख ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले का सम्मान करने के लिए यह कदम उठाया है।

अनिल ने किया था आरोप से इनकार
बीती 25 मार्च को परमबीर सिंह ने अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीआई जांच का अनुरोध करते हुए आपराधिक पीआईएल दाखिल की थी। जिसमें उन्होंने दावा किया कि देशमुख ने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाझे समेत अन्य पुलिस अधिकारियों को बार और रेस्तरां से 100 करोड़ रुपये की वसूली करने को कहा। हालांकि, अनिल देशमुख ने इन आरोपों से इनकार किया है। देशमुख ने मुख्यमंत्री को भेजे गए अपने लेटर में लिखा है कि उन्हें हाई कोर्ट के आदेश के बाद गृह मंत्री पद पर बने रहना नैतिक रूप से सही नहीं लगता है।

15 दिन में प्रारंभिक जांच पूरी कर CBI
बॉम्बे हाई कोर्ट ने आज सीबीआई निर्देश दिया है कि वो 15 दिन के भीतर प्रारंभिक जांच पूरी करे। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी की खंड पीठ ने कहा कि यह असाधारण और अभूतपूर्व मामला है, जिसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

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