– तेजी से बढ़ रहा समुद्री जलस्तर सब कुछ निगलने को आमादा

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। हम हमेशा से सुनते आ रहे हैं कि एक दिन दुनिया का अंत हो जाएगा। हालांकि बहुत सारे लोग इससे इत्तेफाक भी नही रखते, लेकिन हम कहें कि दुनिया के अंत की शुरुआत हो चुकी है और इसकी वजह इंसान जनित ग्लोबल वॉर्मिंग (global warming) है तो। जी हां, ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ध्रुवीय बर्फ पिघल रही है और समुद्र का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इससे फिजी से लेकर मालदीव तक डूबने की कगार पर (islands disappearing due to rising sea levels) हैं। आपको हैरत नही होनी चाहिए कि द्वीप-देशों के कई हिस्से पानी में समा भी चुके है।

60 साल से भी कम समय मे समुद्र में समा जाएंगे द्वीप
बीते कुछ सालों में ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर चेताया जा रहा है कि इससे ध्रुवों पर जमी बर्फ पिघलेगी और समुद्र का पानी बढ़ता (sea level has been rising caused by global warming) जाएग। इससे होगा ये कि समुद्र में बने द्वीपों समेत समुद्र किनारे बसे शहर भी जलमग्न हो जाएंगे। पर्यावरणविद लगातार इस खतरे पर बात कर रहे हैं। खासतौर पर समुद्र के बीचों-बीच खूबसूरत द्वीपों के डूबने को लेकर आगाह किया जा रहा है। कई ऐसे द्वीप हैं, जो अगले 60 साल से भी कम समय में समुद्र में समा जाएंगे।

40 के दशक में लगा पता कि बढ़ रहा समुद्र का पानी
जलमग्न होने के खतरे में आए द्वीपों से पहले एक बार थोड़ी जानकारी समुद्री जलस्तर और जलवायु परिवर्तन पर जुटाते चलते हैं। सबसे पहले 40 के शुरुआती दशक में अमेरिकी वैज्ञानिक बेनो गुटेनबर्ग का ध्यान इस पर गया था। एक स्टडी के दौरान उन्हें संदेह हुआ कि समुद्र में पानी बढ़ रहा है। अपने शक को पक्का करने के लिए गुटेनबर्ग ने बीते 100 सालों के डाटा का अध्ययन किया और उनका शक यकीन में बदल गया। समुद्र का पानी ध्रुवीय बर्फ के पिघलने से लगातार बढ़ता जा रहा है। 90 के दशक में नासा ने भी इसकी पुष्टि कर दी।

सोलोमन के 5 द्वीप समा चुके है समुद्र में
इसके बाद से ग्लोबल वॉर्मिंग के दूसरे खतरों पर तो चर्चा होने लगी। साथ ही ये डर भी बढ़ा कि जल्द ही द्वीप जलमग्न होने लगेंगे। ऐसा ही एक द्वीप-समूह है सोलोमन द्वीप (Solomon Islands). दक्षिणी प्रशांत महासागर में लगभग 1000 द्वीपों से मिलकर बना ये समूह तेजी से पानी में डूब रहा है। रीडर्स डायजेस्ट की एक रिपोर्ट इस बारे में बताती है कि साल 1993 यानी जब से इस पर नजर रखने की शुरुआत हुई, द्वीप-समूह के आसपास का पानी हर साल 8 मिलीमीटर ऊपर आ रहा है। पर्यावरण और विज्ञान पत्रिका एनवायरमेंटल रिसर्च लेटर्स के मुताबिक इसके 5 द्वीप डूब चुके हैं।

वर्ष 2100 से पहले डूब जाएगा मालदीव!
दक्षिण एशिया के उत्तर में बसे मालदीव का नाम लगभग सभी एशियाई जानते होंगे। सैलानियों का स्वर्ग कहा जाने वाले इस द्वीप को हिंद महासागर की शान भी कहा जाता है। यहां सैर-सपाटे के लिए आए लोगों के लिए शानदार रिजॉर्ट और पानी के भीतर होटल भी बने हुए हैं, लेकिन वर्ल्ड बैंक समेत कई संस्थाओं को डर है कि आसपास समुद्र का पानी जिस तेजी से बढ़ रहा है, साल 2100 तक ये द्वीप देश पानी में समा सकता है।

 

डूबने लगा पलाऊ देश, 90 तक डूब जाएगा
प्रशांत महासागर में स्थित द्वीपीय देश पलाऊ भी समुद्र में डूबने की कगार पर खड़ा द्वीप है। पलाऊ नेशनल वेदर सर्विस ऑफिस और पेसिफिक क्लाइमेट चेंज सर्विस प्रोग्राम ने मिलकर ये नतीजा निकाला। साल 1993 से यहां के समुद्र का पानी हर साल लगभग 0.35 इंच ऊपर आ रहा है। गर्मी इसी तेजी से बढ़ी तो जलस्तर सालाना 24 मीटर की गति से ऊपर आने लगेगा। ये हाल 2090 तक हो सकता है। इसके बाद द्वीप को किसी हाल में बचाया नहीं जा सकेगा।

माइक्रोनेशिया के कई द्वीप समुद्र में समा गए
प्रशांत महासागर में बसा देश माइक्रोनेशिया भी पलाऊ जैसा ही एक मुल्क है। हवाई मार्ग से लगभग 2500 मील की दूरी बस बसा ये द्वीप समूह 607 द्वीपों से मिलकर बना है। इसका केवल 270 वर्ग मील हिस्सा ही जमीन का है, जिसमें पहाड़ और बीच भी शामिल हैं। समुद्र का जलस्तर बढ़ने के कारण इसके कई द्वीप तेजी से पानी में समा गए। जबकि कई द्वीपों का आकार लगातार छोटा हो रहा है। जर्नल ऑफ कोस्टल कनजर्वेशन में ये स्टडी आ चुकी।

कुछ दशकों में फिजी भी खत्म हो जाएगा
फिजी का नाम तो काफी लोग आए दिन सुनते हैं। खूबसूरत बीचों से बने इस द्वीप में बड़ी संख्या में भारतीय भी रहते हैं। दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित ये द्वीप भी हमारे कारण खतरे में है। ध्रुवीय बर्फ पिघलते हुए इसे भी अगले कुछ दशकों में समुद्र के भीतर ले जाएगी। यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज का भी यही कहना है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार बीते कुछ ही दशकों में किनारे बसे कई गांवों ने 15-20 मीटर तक डूबने की बात कही गई है।

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