मुजफ्फरनगर, डीडीसी। रामानुज ठाकुर उर्फ मामू तिहाड़ जेल में था और आज मर गया। इसे मामू इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये मुजफ्फरनगर शेल्टर होम कांड मामले के सूत्रधार और शेल्टर होम के संरक्षक ब्रजेश सिंह का मामा था। ये लोग शेल्टर होम की  लड़कियों के साथ न सिर्फ बलात्कार करते थे, बल्कि उन्हें अधिकारियों के बिस्तर तक भी पहुंचाते थे। इंकार पर इन लड़कियों को यातनाएं दी जाती थी। 70 साल का हैवान मामा तिहाड़ जेल की दिवारों के बीच दम तोड़ चुका है।
बालिका गृह दुष्कर्म कांड के 70 साल के आरोपी मामू समेत 19 लोगों को साकेत कोर्ट ने 11 फरवरी 2020 को दोषी करार दिया गया था। 23 फरवरी 2020 को रामानुज ठाकुर उर्फ मामू को तिहाड़ जेल लाया गया। शेल्टर होम के संरक्षक ब्रजेश ठाकुर को अजीवन कारावास के साथ 20 लाख जुर्माने की सजा मिली। इसने 6 से अधिक लड़कियों का यौन शोषण किया और लड़कियों को अधिकारियों तक पहुंचाया। पूरा मामला 26 मई 2018 को तब सामने आया, जब टाटा इस्टीट्यूट ने बिहार सरकार को एक रिपोर्ट सौंपते हुए लड़कियों के यौन शोषण की बात कही। मामले में 31 मई 2018 को सामाजिक कल्याण विभाग के सहायक निदेशक ने मुजफ्फरनगर महिला थाने में मुकदमा दर्ज कराया। जिसके बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफरिश की। फिर 27 जुलाई 2018 को सीबीआई ने पटना स्थित थाने में मामला दर्ज कराया। जिसके बाद सामाजिक कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। मंजू के पति को ब्रजेश का करीबी बताया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पूरे मामले की सुनवाई बिहार के बजाय दिल्ली के साकेत कोर्ट में शुरू की गई। इसमें 19 आरोपियों को सजा मिली, जबकि सुबूतों के  अभाव में दो लोगों को बरी कर दिया गया।

ये हैं कुछ अन्य आरोपी
1- बाल कल्याण समिति सदस्य विकास कुमार हर मंगलवार साथियों के साथ आता और किशोरियों का यौन शोषण करता। अजीवन कारावास के साथ इसे 14 लाख जुर्माने की सजा मिली है।
2- बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दिलीप कुमार की पहचान लड़कियों ने फोटो के जरिये की। ये भी दुष्कर्मी है और सजा के तौर पर अजीवन कारावास की सजा है।
3- शेल्टर होम की हेल्पर किरण कुमार उन लड़कियों को यातनाएं देती थी, जो बिस्तर पर जाने से इंकार करती थी। ये उन्हें भूखा रखती और मारती-पीटती थी।
4- काउंसलर मंजू देवी को 10 साल की सजा हुई। ये लड़कियों को दुष्कर्म कराने के लिए राजी करती थी।
5- शेल्टर होम का रसोइया गुड्डू पटेल भी दुष्कर्मी है और इसे भी अजीवन कारावास की सजा है।
6- हाउस मदर मीनू देवी लड़कियों को नशे की दवा देती, विरोध पर पीटती। इसे भी अजीवन कारावास की सजा मिली है।
7- सफाई कर्मी कृष्ण कुमार राम लड़कियों से अपनी हवस बुझाता और पीटता था। इसे भी उम्र कैद की सजा मिली है।
8- शेल्टर होम की नर्स नेहा कुमार भी लड़कियों को नशे की दवा देती थी। इसे 10 साल की सजा मिली है।
9- शेल्टर होम में चल रहे पूरे खेल पर पर्दा डालने का काम प्रोवेशनरी अधिकारी हेमा मसीह करती और इसे भी 10 साल की सजा मिली है।
10- हाउस मदर चंदा देवी दुष्कर्म के लिए लड़कियों को शेल्टर होम से बाहर भेजती थी। इसे 10 साल की सजा मिली है।
11- रामा शंकर सिंह उर्फ मास्टर साहब भी 10 साल का कारावास भुगत रहे हैं। ये भी दुष्कर्मी है और लड़कियों को पीटता था।
12- अधीक्षिका इंदू कुमार लड़कियों को किसी भी तरह से दुष्कर्म के लिए राजी करती थी। इसे 3 साल की सजा मिली है।

13- ब्रजेश का चालक विजय तिवारी भी उम्रकैद झेल रहा है। ये बलात्कार के साथ लड़कियों की  सप्लाई करता था।

छोटे कपड़ों में अश्लील डांस कराते और सजा में देते थे नमक रोटी
मामले में निलंबित हो चुके बाल संरक्षण पदाधिकारी को अजीवन कारावास की सजा मिली है और डेढ़ लाख जुर्माने की भरपाई करनी है। इस पर शेल्टर होम में किशोरियों की सुरक्षा का दायित्व था, लेकिन ये रात के अंधेरे में किशोरियों को छोटे-छोटे कपड़े पहना कर उनसे अश्लील डांस कराता था  और फिर उनके साथ दुष्कर्म करता था। यही आरोप ब्रजेश की राजदार और कई एनजीओ चलाने वाली शाइस्ता परवीन उर्फ मधु पर हैं। जब लड़कियां इसकी बात नहीं मानती तो सजा के तौर पर ये उन्हें नमक रोटी खिलाती और पीटती थी।

डाक्टर बगैर कपड़ों के करता था लड़कियों की जांच
पूरे मामले में शेल्टर होम के चिकित्सक अश्विनी कुमार को 10 साल की सजा दी गई है। बताया जाता है कि बलात्कार के बाद जब लड़कियां दर्द से कराह रही होती थीं तो इलाज के लिए इसी के पास ले जाया जाता था। ये लड़कियों को दर्द की दवा था और जब उनकी जांच करता तो उनके सारे कपड़े निकाल देता था। तत्कालीन सहायक निदेशक रोजी रानी को इस मामले में 6 माह की सजा मिलसी है। बताया गया कि पूरे मामले की जानकारी रोजी रानी को थी, लेकिन उसने कोई एक्शन नहीं लिया।

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