– पेट के लिए लूटना और ब्लैकमेल करना सीख गए मथुरा के बंदर

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। कान्हा की नगरी मथुरा… वो मथुरा जहां कान्हा ने खूब माखन चोरी किया और न सिर्फ खुद खाया बल्कि अपने सखाओं को भी खिलाया। अब कान्हा जैसी करामात मथुरा की वानर सेना भी सीख चुकी है। नजर चूकते ही ये वानर सेना आपको अपना शिकार बना लेती है। आपका समान ये पलक झपकते लूट लेते हैं और फिर शुरू होती है ब्लैकमेलिंग। ये खबर खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो कान्हा की नगरी घूमने जाना चाहते हैं और अगर जा रहे है तो इन लुटेरे वानरों से जरा संभल कर।

ऐसे बनाते हैं लुटेरे वानर अपना शिकार
मथुरा एक पौराणिक और पर्यटन स्थली है। यहां हर रोज हजारों लोग बाहरी राज्यों और विदेशों से घूमने के लिए आते हैं। इस शहर में जितने लोग रहते हैं, उससे कम संख्या यहां वानरों की भी नही है। वानर बाहर से आने वालों को अपना शिकार बनाते हैं। अमूमन भ्रमण के दौरान लोग अपने मे मस्त होते हैं और तभी ये वानर सेना पर्यटकों का चश्मा, बैन, मोबाइल इत्यादि लूट कर फरार हो जाते हैं।

पेट भरने के लिए योजनाबद्ध लूट
अगर आप इन वानर सेना पर गौर करें तो सब आसानी से समझ आ जएगा। इन वानरों का ये प्रोपेगेंडा केवल और केवल अपना पेट भरने के लिए होता है। जब ये आपके वस्तुओं की लूट करते हैं तो बहुत दूर नही भागते। ये आपकी नजरो के आसपास, लेकिन पहुंच से दूर होते हैं। ये सब इसलिए कि आप अपना सामान वापस पाने के एवज में इन्हें कुछ खाने को दें। जब आप इन्हें खाने को दे देते हैं तो ये आपका समान छोड़ देते हैं।

अपना और पूरे परिवार का पेट भरना होता है
वानर अमूमन झुंड में रहते है, लेकिन कुछ एकल जीवन भी जीते है। झुंड में रहने वाले वानरों का नेतृत्व झुंड का सबसे ताकतवर और चालक वानर करता है। इस वानर पर पूरे झुंड का पेट भरने की जिम्मेदारी होती है। जब ये वानर लूट करता है तो लूटने के बाद आपके आसपास घूमता है। जिसके बाद पूरा झुंड आपके आसपास आ जाएगा। अब आप खिलाएंगे उस वानर को, जिसके पास आपका सामान होगा, लेकिन वो तब तक नही खाएगा जब तक पूरे झुंड तक खाना नहीं पहुंच जाता। कहने का मतलब आप खाना उसे देंगे, जिसके पास आपका सामान होगा, लेकिन खाएगा झुंड का दूसरा वानर।

कपड़े धुलने के बाद रखवाली भी करनी होती है
ऐसा नही है कि इन लुटेरे वानरों से केवल पर्यटक ही परेशान है, बल्कि स्थानीय लोग भी इनसे आजिज आ चुके हैं। मजाल क्या स्थानीय लोगों की कि वो छत पर कोई सामान रख कर अन्य काम में लग जाएं। यानी वानरों से नजर हटी और दुर्घटना घटी। मथुरा में जब लोग गेहूं या घुले कपड़े सुखाते हैं तो छत पर बैठ कर इनकी रखवाली करते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि गेंहू तक तो समझ आया, क्योंकि उससे वानरों का पेट भर सकता है, लेकिन कपड़े? तो गुरु जी कपड़ों के साथ ये वानर खेलते हैं और फाड़-फाड़ कर खेलते हैं।

जब जंगल छिनेगा तो जानवर लूट ही करेगा
जंगल जानवरों के लिए है और खुला आसमां इंसानों के लिए। अब हुआ ऐसा की इंसानी आबादी बढ़ी तो जंगल काट कर इन इंसानों ने अपने लिए खुला आसमां बना लिया। इंसानों को रहने की जगह तो मिल गई और जानवरों से उनका घर यानी जंगल छिन गया। अब जब जंगल बचे ही नही तो ये जानवर जाए कहां। ऐसे में जानवरों ने भी इंसानों की जमीन, उनके खाने पर अधिग्रहण शुरू कर दिया। अब यही जानवर छीन कर खाना और लूट कर खाना सीख चुके। कुल मिला कर जंगल छिनेगा तो जानवर लूट ही करेगा।

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