– मऊ दंगे के विरोध में निकले योगी के काफिले पर हुई थी फायरिंग

लखनऊ, डीडीसी। डॉन और उत्तर प्रदेश का बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को अब पहचान की जरूरत नही। मुख्तार अंसारी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच तकरार की वजह भी यही मऊ दंगा है। 16 साल से योगी इस तकरार को दिल में पाले बैठें हैं, लेकिन अब हिसाब-किताब का वक्त आ चुका है। क्योंकि योगी अब मुख्तार पंजाब की जेल से निकाल कर उत्तर प्रदेश ले आएं हैं। मऊ दंगे के बाद योगी ने एलान किया था कि अगर मुख्तार पर कानूनी कार्यवाही नही होती तो वह अपने तरीके से हिसाब करेंगे। मुख्तार उस वक्त विधायक था और योगी गोरखपुर के सांसद। ये वाक्या वर्ष 2005 का है।

योगी ने उठाया था दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलाने का बीड़ा
उस समय मुख्तार अंसारी खुली गाड़ी में दंगे वाली जगहों पर घूम रहा था। उसी समय मुख्तार पर दंगों को भड़काने का आरोप लगा था। इन दंगों के बाद 2006 में गोरखपुर से तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने मुख्तार अंसारी को चुनौती दी थी कि वह मऊ दंगे के पीड़ितों को इंसाफ दिलाएंगे। जब वह गोरखपुर से मऊ जिले के लिके निकले तो उन्हें दोहरीघाट में ही रोक दिया गया था।

आजमगढ़ में खींचा गया योगी के विरोध का खाका
तीन साल बाद 2008 में योगी आदित्यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी के नेतृत्व में एलान किया कि वो आजमगढ़ में आतंकवाद के खिलाफ रैली निकालेंगे। इसके लिए 7 सितंबर 2008 का दिन और कार्यक्रम के डीएवी कॉलेज का मैदान चुना गया। योगी इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता थे। रैली की सुबह गोरखनाथ मंदिर से करीब 40 वाहनों का काफिला निकला। इधर आजमगढ़ में योगी के विरोध खाका खींचा जा चुका था और ये बात योगी अच्छी तरह जानते थे कि आजमगढ़ में उन्हें विरोध का सामना करना पड़ेगा।

आरोप : मुख्तार ने कराया काफिले पर हमला
गोरखनाथ मंदिर से काफिला निकला। इस काफिले में योगी लाल रंग की एसयूवी में सवार थे और एसयूवी काफिले में सातवें नंबर पर चल रही थी। आजमगढ़ पहुंचते-पहुंचते काफिले में सैकड़ो गाड़ियां शामिल हो गईं। तभी योगी की एसयूवी पर एक पत्थर गिरा और बवाल हो गया। तब आरोप लगा कि हमला सुनियोजित था और इसके पीछे मुख्तार का हाथ था।

“गोली मारने को उनकी भाषा मे जवाब देंगे”
काफिले पर हमले के बाद योगी आदित्यनाथ ने संकेत दिया था कि उन पर किसने हमला करवाया था। तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि काफिले पर लगातार एक पक्ष से गोलियां चल रही थी। गाड़ियों को तोड़ा जा रहा था और पुलिस मौन थी। उन्होंने कहा, हम लोग इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे। जिसने भी गोली मारी है, अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करेगी तो गोली मारने वालों को उसी की भाषा मे जवाब दिया जाएगा।

तब उत्तर प्रदेश में सपा का शासन था
मऊ दंगे में मुख्तार अंसारी को खुली जिप्सी पर सवार देखा गया। इस जिप्सी पर मुख्तार के साथ और लोग भी सवार थे। इन लोगों के पास हथियार थे। आरोप लगा कि दंगा मुख्तार ने ही कराया। उस वक्त उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। उस वक्त मुख्तार पर लगे आरोप साबित नही हो सके। वर्ष 2009 में एक बार फिर दंगे की फाइल खोलने की पैरवी की गई। आपको बता दें कि इस मामले में गवाह अपनी गवाही से मुकर गए थे।

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