– हल्द्वानी में कुछ और मौतों के इंतजार में है वन विभाग और पुलिस

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। बरसात में बेसब्र पहाड़ की नदियां कब तांडव मचा दें, कुछ पक्का नहीं होगा। बरसाती दिनों में पहाड़ी नदी-नाले अकसर किसी न किसी की जान का सबब बनते हैं और जान जाने के पीछे या तो लापरवाही जान जाने वाली की होती है या फिर पुलिस और वन विभाग की। ये दोनों ही विभाग मौतों के बाद चुस्त और फिर सुस्त हो जाते हैं। हल्द्वानी की गौला नदी भी कई मौतों की गवाह है और मौतों की वजह नदी तो कतई नहीं है। हम आपसे बीते मंगलवार की कुछ तस्वीरें और वीडियो साझा कर रहे हैं। जो ये कह रही हैं कि जब गौला में उफान आएगा तो मौत का शोर सबको रुलाएगा।

मौत होती है क्योंकि पुलिस सोती है
पुलिस, अदालत और संविधान न हो तो लोग बेलगाम हो जाएं। ये लगाम ही समाज में व्यवस्था और लोगों को दायरा बताती है। ऐसे में जब लोग दायरा पार करते हैं तो सबसे पहले पुलिस पर अंगुली उठती है और ये लाज़मी भी है। dakiyaa.com की टीम जब गौला पुल पर नदी का हाल देखने पहुंची तो दंग रह गई। पुल पर बनी चौकी में सिपाही तो मौजूद था, लेकिन मोबाइल में व्यस्त। इसकी एक वजह यह भी थी कि चौकी के बाहर धूप भी बहुत थी। इसके इतर नदी में पुल की दोनों तरफ नहाने और मौज मस्ती करने वालों का मजमा लगा था।

जुलाई में हो गई थी दो सगे भाइयों की मौत
इसी साल जुलाई में गौला नदी में नहाते वक्त 15 साल के रोमिंस और 12 साल के रोहन की डूबने से मौत हो गई थी। दोनों बच्चे बरेली रोड स्थित गौजाजली वार्ड 60 में परिवार संग रहते थे। बच्चों के पिता राम प्रसाद मजदूरी और मां कमलेश घरों में काम करती है। दोनों बच्चे हादसे से कुछ दिन पहले गौला नदी में नहाने जा रहे थे, लेकिन मां न जाने नहीं दिया। हालांकि ये मौतें बानगी भर हैं। हमारे पास इन मौतों की एक लंबी लिस्ट है।

मौज-मस्ती की स्थली गौला नदी
काठगोदाम में गौला बैराज से लेकर हल्द्वानी और लालकुंआ तक गर्मी के दिनों में गौला नही मौज मस्ती की स्थली बन जाती है। फिर क्या बड़े और क्या बच्चे। नदी किनारों से सटी बस्तियों और कॉलोनियों में रहने वाले बच्चे नदी को तेज धारा में कूद मारते, नहाते दिखते है। जबकि बड़े नदी किनारे जाम से जाम टकराते नजर आते है। कई दफा तो नशा भी नदी में मौत की वजह बना है।

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