– देश की 1412 जेलों में कैद हैं तकरीबन 5 लाख लोग

भरत गुप्ता, डीडीसी। देश में हर रोज हजारों लोग मर रहे हैं, लाखों लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं और ये संख्या हर गुजरते दिन के साथ बढ़ रही है। ये सब तब है जब लोग सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सेनेटाइजेशन का सहारा ले रहे हैं, लेकिन सोचिए उन जेलों में क्या हाल होगा जहां सोशल डिस्टेंसिंग का चिडिय़ा कभी नहीं फडफ़ड़ाती। इन जेलों में मास्क का नाम लेना बेमानी है और सेनेटाइजेशन बस अफसरों की सोच तक ही सीमित है। अंदाजा लगाइए कि जब कोरोना खुली हवा में कहर बरपा रहा है तो ऊंची-ऊंची चाहरदीवारी वाली जेलों में क्या आलम होगा। देश की 1412 जेलों में तकरीबन 5 लाख लोग कैद और जब यहां कोरोना का प्रहार होगा तो यकीन मानिए कि लाशें सरकार तो नहीं गिन पाएगी। आइए जानते हैं डाकिया के यूपी हेड भरत गुप्ता की पड़ताल करती रिपोर्ट।

आंकड़ों पर डालिए एक सरसरी नजर
एनसीआरबी के मुताबिक देश की जेलों में बंद हैं 4,78,600 कैदी
2016 में ऑक्यूपेंसी रेट 114 फीदस था, जो वर्ष 2019 में 119 फीसदी हो गया
देश में हर 10 में 7 बंदी अंडर ट्रायल है
यानी देश की जेलों में 69 फीसदी कैदी विचाराधीन हैं
यानी जिन जेलों की क्षमता 100 कैदी की है, वहां 175 कैदी रहते हैं
उत्तर प्रदेश में 100 कैदियों पर 168 कैदी रहते हैं
उत्तराखंड की हल्द्वानी जेल में 250 पर 800 से ज्यादा कैदी रहते हैं

तिहाड़ में 1 मरी और 30 पॉजिटिव, गोरखपुर में 1 मरा
अभी हमने केवल एक अनुमान लगाया है कि जेलों में अगर कोरोना विस्फोट हुआ तो क्या होगा। हम ये अनुमान सिर्फ इसलिए लगा रहा है कि देश की जेलों में कोरोना का कहर बरपना शुरू हो चुका है। देश की सबसे बड़ी और सुरक्षित जेलों में से एक तिहाड़ जेल में 30 महिला कैदी कोरोना पॉजिटिव मिली हैं और इसमें से एक की मौत भी हो चुकी है। गोरखपुर जेल में एक बंदी की कोरोना की वजह से मौत हो गई। जिसके बाद 65 कैदियों को तत्काल अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया। इतना सब देखने के बाद वाराणसी जेल से 350 बंदी पैरोल पर छोड़े जा रहे हैं।

 

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