नई दिल्ली, डीडीसी। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी की बहू अपूर्वा की सलाखों से बाहर आने की सारी कोशिशें धरी की धरी रह गईं। अपूर्वा की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी एक प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखती है और अभी कई गवाहों की गवाही होनी है। ऐसे में आरोपी को जमानत देकर सुबूतों को प्रभावित करने की इजाजत नही दी जा सकती।
इस मामले में दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को अपूर्वा शुक्ला की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। बता दें कि रोहित तिवारी की हत्या पिछले साल 15-16 अप्रैल की रात की गई थी। हत्या की रात रोहित की पत्नी अपूर्वा घटनास्थल पर पाई गईं थीं और यह भी सामने आया था कि 16 अप्रैल को रोहित और अपूर्वा में मारपीट भी हुई थी। इन सबकी वजह थी रोहित के साथ एक महिला का शराब पीना। पुलिस का तो यही मानना है कि इसी वजह से हत्या भी हुई। मामले में याचिका दायर करते हुए अपूर्वा के वकील ने कहा कि अभी परिवार से जुड़े 11 गवाहों के बयान हो चुके हैं। अब ऐसा कोई गवाह नही जिसे आरोपी प्रभावित कर सके। कोर्ट ने कहा है कि बेल देने से पहले आरोपी का स्टेटस देखना जरूरी है। अभी कई गवाहों के बयान और सवाल बाकी हैं। ऐसे में अगर बेल याचिका मान ली जाए तो सुबूत और गवाह प्रभावित हो सकते है। इतना ही नही, घटना की रात अपूर्वा को उसी फ्लोर पर देखा गया, जहां से रोहित की लाश मिली और यह सीसीटीवी फुटेज से पहले ही साफ हो चुका है। ऐसे में सबसे ज्यादा शक के घेरे में अपूर्वा है। उन पर हत्या का चार्ज है और जमानत देकर उन्हें सबूत से छेड़छाड़ या मिटाने की इजाजत नही दी जा सकती। जबकि पूरे मामले में पुलिस की दलील थी कि हत्या के बाद अपूर्वा ने अभी तक पुलिस को कोई जानकारी नही दी है।

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