कोलकाता, डीडीसी। अब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दूर नहीं है। बंगाली राजनीति के इस अखाड़े के राजनीतिक पहलवानों के बीच जोर-आजमाइश भी शुरू चुकी है। भारत में भगवा का बढ़ता कद कहीं न कहीं बंगाली राजनीति के धुरंधरों को भी डरा रहा है। 2019 के चुनाव में पहले ही रंग दिखा चुकी भाजपा का गुमान आसमान पर है और आने वाले चुनाव में ममता और मोदी के बीच सीधा मुकाबला तय है। ये मुकाबला साख का सवाल है और जीत की लकीर पीटने के लिए दोनों ही कोर-कसर नहीं छोड़ रहे। भाजपा अब बंगाल को भी भगवा रंग में रंगना चाहती है, लेकिन दीदी भी पुरानी दांवबाज है। इस ख्वाहिश को अंजाम तक पहुंचाने के लिए दोनों ही पार्टियां नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को मुफीद वक्त मान रहे हैं और दोनों ने इस जयंती को राजनीति के तुरुप के पत्ते के तौर पर इस्तेमाल करने का इरादा रखते हैं। भाजपा नेताजी के बूते देश के साथ बंगाली दिल को अपने लिए पिघलाना चाहती है तो दीदी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुनाने की मुहिम शुरू कर दी है। आपको तो पता ही होगा कि 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती है।

क्या है टीम मोदी का मिशन पश्चिम बंगाल और नेताजी
23 जनवरी को नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है और इसी देखते हुए खबर उड़ी थी कि 23 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे। इसे देखते हुए पश्चिम बंगाल राज्य इकाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण भी भेजा था। बीते सोमवार को केेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। इस समिति में नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को लेकर बड़ी रूपरेखा बनाई गई है। इसके तहत केंद्र सरकार व्यापक स्तर पर नेती जी की जयंती मनाने की तैयारी में है।

और ये है दीदी की राजनीतिक रणनीति
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाने की तैयारियों में जुट चुकीं हैं। उन्होंने तो केंद्र सरकार से जयंती का दिन राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने तक की मांग कर दी है। साथ ही कहा है कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें लगता है कि आजादी के बाद से नेता जी के लिए कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं किया गया है। राष्ट्रीय अवकाश के लिए उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा है। दीदी ने फैसला किया है कि 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को देश नायक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इसके तहत 23 जनवरी को कोलकाता के श्याम बाजार से नेताजी प्रतिमा तक पुलिस बैंड के साथ रैली निकाली जाएगी। जबकि 26 जनवरी को नेता जी के जीवन पर आधारित एक झांकी प्रदर्शित की जाएगी।

मोदी की थाली का जवाब में दीदी का शंख नाद
लॉक डाउन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक खास दिन, खास वक्त पर एक साथ थाली और ताली बजाने के लिए कहा था। देशवासियों ने ऐसा किया भी। हालांकि विरोधियों की वाणी इस पर भी शांत नहीं थी। अब दीदी भी इसी परिपाटी पर चल पड़ी हैं और बहाना है नेताजी की जयंती। अपने एक बयान में दीदी ने न सिर्फ देशवासियों से बल्कि देश के बाहर रह रहे एनआरआई से भी अपील की है कि वो नेताजी की जयंती पर दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर एक साथ शंख बजाएं। गौरतलब है कि वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हैं और नेताजी सुभाष चंद्र बोस न सिर्फ पश्चिम बंगाल में बल्कि पूरे भारत में अलग साख और सम्मान रखते हैं। इतना ही नहीं भारत के साथ बंगाली मानुष के दिल में उनका खासा प्रभाव है। ऐसे में टीम मोदी और दीदी दोनों के बीच बंगाली मानुष के दिल के इस हिस्से को छूने की कोशिश है।

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