– आधी रात दिल्ली में आलाकमान से मुलाकात के निकाले जा रहे कई मायने

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। तकरीबन साढ़े 4 साल की सरकार में उत्तराखंड को तीसरा सीएम मिलने की कवायद को बल मिल रहा। माना जा रहा है कि एक बार फिर मुख्यमंत्री बदला जा सकता है। त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह इसी साल मार्च में तीरथ सिंह रावत को सीएम बनाया गया था। अब जबकि राज्य में विधानसभा चुनाव होने में एक साल का वक्त भी नहीं रह गया है। ऐसे में भाजपा एक बार फिर सीएम बदलने के मूड में दिख रही है। अचानक दिल्ली तलब किए जाने के बाद बुधवार आधी रात के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की मुलाकात गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ हुई थी, लेकिन इसके बाद से सस्पेंस और अटकलों का दौर जारी है क्योंकि तीरथ रावत को गुरुवार शाम तक उत्तराखंड लौटना था, मगर अचानक उनकी वापसी रद्द हो गई।

भाजपा ने खारिज की संभावनाएं
संभावना यह जताई जा रही है कि उत्तराखंड में चुनावों के मद्देनज़र एक बार फिर नेतृत्व बदला जा सकता है। हालांकि भाजपा ने इस संभावना को दरकिनार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का शीर्ष नेताओं से मिलना रूटीन का हिस्सा होता है। फिलहाल यह खबर आग की तरह फैल रही है कि तीरथ सिंह रावत सीएम के पद पर कुछ ही दिनों के मेहमान और हैं।

उपचुनाव के पक्ष में नही आलाकमान
तीरथ सिंह रावत और पार्टी आलाकमान से मुलाकात को उपचुनाव का मसला बताया जा रहा, लेकिन पता यह भी लग रहा है पार्टी उपचुनाव के मूड में नही हैं। खबर यह भी है कि रावत ने अपने संसदीय क्षेत्र पौड़ी गढ़वाल से ही चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं और इस सीट के खाली करवाए जाने का रास्ता भी साफ है। अब अगर पार्टी ने उपचुनाव का फैसला किया तो अन्य राज्यों में भी खाली सीटों पर उपचुनाव करवाने पड़ेंगे। इसलिए पार्टी उपचुनाव नहीं बल्कि अगले साल राज्य विधानसभा चुनाव पर फोकस कर रही है। हालांकि बुधवार आधी रात तीरथ सिंह रावत की नड्डा और शाह की मुलाकात पर बीजेपी ने आधिकारिक तौर पर अब तक कुछ नही कहा हैं।

मतभेद अपनों से तीरथ के भी कम नहीं
3 दिन पहले बीजेपी उत्तराखंड अध्यक्ष ने बयान दिया था कि विधानसभा चुनाव में तीरथ ही मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे। हालांकि बीजेपी आलाकमान, तीरथ सिंह रावत और उत्तराखंड विधायकों के बीच मतभेद की खबरें भी हैं। हालांकि इससे ऊपर उठ कर पार्टी 2012 वाली ही रणनीति अपनाकर चुनाव से कुछ ही महीने पहले फिर मुख्यमंत्री बदलने के मूड में आ गई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नही है, लेकिन पल-पल पुख्ता होती संभावनाओं को भी दरकिनार नही किया जा सकता।

लेकिन सियासी समीकरण तो कुछ और कह रहे हैं
27 से 29 जून तक भाजपा ने उत्तराखंड चुनावों को लेकर जो चिंतन शिविर किया, उसके बाद राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज कुछ और विधायकों के साथ दिल्ली पहुंच गए। इधर, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बीते बुधवार को ही जूना अखाड़ा के महंत अवधेशानंद गिरि से ​हरिद्वार में मुलाकात की। बताया जा रहा है कि त्रिवेंद्र अपने पक्ष में संत समुदाय का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ, त्रिवेंद्र सिंह रावत की सक्रियता को लेकर एक अन्य खबर कह रही है कि दौरे से लौटने पर देहरादून में उनके स्वागत की तैयारियों को लेकर चर्चाएं ज़ोरों पर हैं। राज्य सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने यही कहा कि दिल्ली दौरे पर मुख्यमंत्री तीरथ के साथ आलाकमान ने 2022 के विधानसभा चुनावों को लेकर ही चर्चा की है।

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