– बहुत सारे राज पाताल भुवनेश्वर ने अपने सीने में छिपा रखे हैं

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। दुनिया के अंत की बातें अक्सर होती हैं। कभी धरती पर जल प्रलय की बात होती है तो कभी कहां गया कि वर्ष 2000 में पृथ्वी का अंत हो जाएगा। हालांकि ऐसा हुआ नही, लेकिन एक बात सत्य है और वो ये कि इस पृथ्वी पर सब की उम्र तय है। स्वयं पृथ्वी भी इस सत्य से अछूती नही है। पृथ्वी के अंत से जुड़ा ऐसा ही एक राज पाताल भुवनेश्वर ने अपने सीने में छिपा रखा है। पाताल भुवनेश्वर पृथ्वी की गहराई में बनी एक प्राकृतिक, रहस्यमयी और रोमांचित करने वाली गुफा है। यहां आप चारों धाम के दर्शन एक साथ कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं कि क्या इस गुफा में छिपा पृथ्वी के अंत का रहस्य?

 

जमीन से 90 फीट नीचे पृथ्वी के गर्भ में स्थित है गुफा
पाताल भुवनेश्वर चूना पत्थर की एक गुफा है, जो उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट शहर से 14 किमी की दूरी पर स्थित है। इस गुफा में धार्मिक तथा ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कई प्राकृतिक कलाकृतियां स्थित हैं। यह गुफा जमीन से 90 फ़ीट नीचे है और करीब 160 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली हुई है।

लगातार बढ़ते शिवलिंग के गुफा की छत से टकराते ही होगा विनाश
इस गुफा की सबसे खास बात तो यह है कि यहां एक शिवलिंग है जो लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में शिवलिंग की ऊंचाई 1.50 फीट है और शिवलिंग द्वारा गुफा की छत को छूने की लंबाई तीन फीट है। शिवलिंग को लेकर यह मान्यता है कि जब यह शिवलिंग गुफा की छत को छू लेगा, तब दुनिया खत्म हो जाएगी। संकरे रास्ते से होते हुए इस गुफा में प्रवेश किया जा सकता है। गुफा के अंदर जाने के लिए लोहे की जंजीरों का सहारा लेना पड़ता है। इसकी दीवारों से पानी रिस्ता रहता है, जिसके कारण यहां जाने का रास्ता बेहद चिकना है। गुफा में शेष नाग के आकर का पत्थर है और एेसा लगता है जैसे शेषनाग ने पृथ्वी को अपने फन पर उठा रखा है।

पहली बार हरिद्वार के राजा ऋतुपर्णा ने खोजी थी गुफा
इस गुफा की खोज राजा ऋतुपर्णा ने की थी, जो सूर्य वंश के राजा थे और त्रेता युग में अयोध्या पर शासन करते थे। स्कंदपुराण में वर्णन है कि स्वयं महादेव शिव पाताल भुवनेश्वर में विराजमान रहते हैं और अन्य देवी देवता उनकी स्तुति करने यहां आते हैं। स्कंद पुराण में लिखा है कि राजा ऋतुपर्ण एक हिरण का पीछा करते हुए इस गुफा में पहुंचे तो उन्होंने इस गुफा के भीतर महादेव शिव और 33 कोटि देवी-देवताओं के साक्षात दर्शन किए। कहते हैं कि द्वापर युग में पाण्डवों ने यहां चौपड़ खेली और कलयुग में जगदगुरु आदि शंकराचार्य का 822 ई में इस गुफा को खोजा और यहां तांबे का एक शिवलिंग स्थापित किया।

गुफा में है भगवान गणेश का कटा सिर और 1 हजार पैर वाला हाथी
भगवान शिव ने क्रोध में भगवान गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया था। ऐसा कहा जाता है कि जो शिव ने जो सिर गणेश के शरीर से अलग किया था, वह उन्होंने इस गुफा में रखा था। दीवारों पर हंस बने हुए हैं जिसके बारे में मान्यता है कि यह ब्रह्मा जी का हंस है। गुफा के अंदर एक हवन कुंड है और कहते हैं कि इसमें जनमेजय ने नाग यज्ञ किया था जिसमें सभी सांप जलकर भस्म हो गए थे। इस गुफा में एक हजार पैर वाला हाथी भी बना हुआ है।

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