– ठेकेदारों के सिंडीकेट ने फिर बना ली है मेले की आड़ में बड़ी डकैती की योजना

चम्पावत, डीडीसी। प्रेम से बोलो जय माता की… ताकि मुराद पूरी हो। हालांकि मुराद पूरी भी हो रही है, लेकिन ठेकेदार सिंडीकेट की। ये वो ठेकरदार सिंडीकेट है, जिसे मेले को जगमग करने का ठेका दिया जाता है। इस सिंडिकेट ने एक बार भक्तों का धन लूटने को चाबी ढूंढ ली है। इंतजार है तो बस पूर्णागिरि मेला शुरू होने की। इस खुली लूट का अंदाजा सिर्फ इस आंकड़े से लगाया जा सकता है कि मेले में बजने वाले जिस साउंड का किराया पिछले साल ठेकेदार ने 10 पैसा प्रतिदिन के हिसाब से लिया था, इस साल उसी साउंड का किराया 1500 रुपया प्रतिदिन लिया जाएगा। ये सिर्फ एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का किराया है। जबकि ऐसे दर्जभर से ज्यादा उपकरण का कई गुना किराया लूटा जाएगा। ठेकेदारों को भुगतान उस रकम से किया जाता है, जिसे वह चढ़ावे के रूप में दान पेटी या माता के चरणों मे चढ़ाते हैं। तो भक्तों बोलिए जय माता की और आइए इस ‘पूर्णागिरि लूट कांड’ को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं।

मां भागीरथी पर इतनी मेहबानी क्यों
सूत्रों के हवाले से खबर है कि पूरा मामला मुख्यमंत्री के कानों तक पहुंच चुका है। बताते हैं कि पूर्णागिरी मेला लगने से पहले मेले की लाइटिंग का टेंडर होता है। पिछले साल ये टेंडर फरुखाबाद की मां भागीरथी इलेक्ट्रिकल को मिला था और वजह थी कि इनके रेट और ठेकेदारों से कम थे। अब वर्ष 2021 का टेंडर भी इनके नाम है और वजह इस बार भी यही है कि इनके रेट और ठेकेदारों से कम है, लेकिन रेट पिछले साल से 200 गुना ज्यादा है। ऐसे ठेकेदार पर मेहरबानी करने से पहले एक बार पिछले साल के रेट और वर्तमान वर्ष के रेट में तुलना करना जरूरी था। आखिर ये सीधे तौर पर जनता के पैसों की बर्बादी है।

पिछले साल लगा था भागीरथी पर दाग, लेकिन…
पिछले वर्ष मां भागीरथी इलेक्ट्रिकल पर आरोप लगा था कि उसने फर्जी दस्तावेजों के बूते वर्ष 2020 का टेंडर अपने नाम कराया था। जिसके बाद री-टेंडर हुआ। हालांकि इतने बड़े आरोप के बावजूद मां भागीरथी इलेक्ट्रिकल को री-टेंडर में प्रवेश की अनुमति दे गई। जबकि गम्भीर आरोप पर दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए थी। इसके बाद री-टेंडर की इजाजत दी जानी चाहिए थी। हालांकि ऐसा हुआ नही। सूत्रों की माने तो वर्ष 2019 में भी इसी कंपनी ने ठेका उठाया था, लेकिन किसी और के नाम पर। जिसके बाद फर्जी दस्तावेज के जरिये भगवती टेंडर में शामिल हुई। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर फरुखाबाद के ठेकेदार पर इतनी मेहरबानी क्यों?

क्या है सिंडीकेट और कैसे होता है खेल
एक टेंडर निकलता है और इस टेंडर पर दर्जनों ठेकेदारों की नजर होती है, लेकिन ठेका सिर्फ एक को मिलता है। अब होता ये है कि सबसे बड़ा ठेकेदार छोटे ठेकेदारों को अपने साथ मिला लेता है। इसके एवज में छोटे ठेकेदारों को पैसा दिया जाता है। जिसके बाद सभी टेंडर प्रक्रिया में शामिल होते हैं। बड़ा ठेकेदार अपने मनमाफिक रेट टेंडर में डालता है और अन्य ठेकेदार इससे कम रेट अपने टेंडर में दर्ज करता है। चूंकि रेट बहुत अधिक, लेकिन अन्य ठेकेदारों के रेट से कम होता है। इसलिए कीमत ज्यादा होने पर भी मजबूरी में टेंडर बड़े ठेकेदार को देना पड़ता है।

ये हैं पिछले और इस वर्ष के रेट
सामान                  वर्ष 2020       वर्ष 2021 
ट्यूब लाइट 40 वाट        11                12
सीएफएल 10 वाट      0.10                11
सीएफएल बॉक्स         0.10             100
एलईडी बल्ब 10 वाट.     11               12
मेटल लाइट                 0.10            200
कूलर.                        0.01               30
पंखा                          0.10               10
झालर                        0.10               10
साउंड सिस्टम             0.10           1500
नोट : आंकड़े रुपये में व अनुमानित हैं

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