नागपुर, डीडीसी। गुजरात (Gujarat) के अहमदाबाद (Ahamadabad) में रहने वाली जस्टिस (judge) पुष्पा गनेदीवाला को कॉन्डम (condom) का पैकेट भेजा है। जस्टिस पुष्पा बॉम्बे हाईकोर्ट की जज हैं। यह कारनामा जस्टिस पुष्पा के उस फैसले के विरोध में किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि बिना कपड़े उतारे ऊपर से ब्रेस्ट छूना यौन शोषण नहीं है। राजनीतिक विश्लेषक का दावा है कि जस्टिस के इस तरह के फैसले से समाज में अपराधियों को गलत संदेश मिला।

ये है पूरा मामला
देवश्री त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने जस्टिस पुष्पा के फैसले का विरोध जताने के लिए उनके घर और दफ्तर के पते पर कंडोम के 150 पैकेट भेजे हैं। देवश्री का कहना है कि जस्टिस पुष्पा का मानना है कि अगर स्किन को नहीं छुआ है तो फिर यौन शोषण नहीं है। मैंने उनको कंडोम भेजकर बताया है कि इसका इस्तेमाल करने पर भी स्किन टच नहीं होता तो इसे क्या कहा जाएगा? देवश्री का कहना है कि मैंने एक चिट्ठी भी जस्टिस पुष्णा को लिखी है और उनके फैसले पर एतराज जताया है। उन्होंने जस्टिस गनेदीवाला को सस्पेंड करने की भी मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फैसले पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को संज्ञान लेते हुए तुरंत गनेडीवाला के स्किन-टू-स्किन फैसले पर रोक लगा दी थी। हालांकि उनके विवादास्पद फैसलों के कारण नाबालिग सरवाइवर न्याय पाने में असफल रही। न्यायाधीश को ऐसे निर्णय देने के बाद कुर्सी पर रहने का कोई अधिकार नहीं है, जो महिलाओं के खिलाफ अपराधों को प्रोत्साहित करें। मैं उन्हें कंडोम के पैकेट तब तक भेजती रहूंगी, जब तक वह सामने नहीं आतीं और मेरे सवालों का जवाब नहीं देतीं।

कंडोम के साथ यू ट्यूब पर शेयर किया वीडियो
देवश्री त्रिवेदी ने 13 फरवरी को 12 पैकेटों में लगभग 150 कॉन्डम की पैकिंग दिखाते हुए YouTube वीडियो पर भी अपलोड किया था। देवश्री ने कहा कि उन्होंने नागपुर में हाई कोर्ट रजिस्ट्रार और जज के आधिकारिक निवास सहित विभिन्न पते पर पैकेट भेजे हैं। उन्होंने मुंबई में हाई कोर्ट की मुख्य बेंच को भी कुछ पैकेट भेजे।

हाई कोर्ट रजिस्ट्रार का टिप्पणी से इंकार
त्रिवेदी ने दावा किया कि उसके पास पंजीकृत पार्सल की वैध रसीदें हैं, जिनके जरिए उन्होंने पैकेट भेजे हैं। इस मामले में हाई कोर्ट रजिस्ट्रार ने टिप्पणी करने से इनकार किया है। रजिस्ट्रार (प्रशासन) संजय भरुका ने कहा, हम इस तरह के मुद्दों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। क्योंकि यह हमारे अधिकार क्षेत्र से बाहर है। यहां तक कि वरिष्ठ प्रशासनिक न्यायाधीश नितिन जामदार ने मीडिया टीम से मिलने से इंकार कर दिया।

महिला पर मुकदमा दर्ज करने की मांग
नागपुर पीठ में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के एक समूह ने गुजरात की महिला के इस कदम पर नाराजगी व्यक्त की और हाई कोर्ट प्रशासन से उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और यहां तक कि अवमानना का मामला दर्ज करने का अनुरोध किया है। वकीलों का कहना है कि कोई भी न्यायाधीश की गरिमा को इस तरह से बदनाम नहीं कर सकता है। यदि रजिस्ट्री कोई कार्रवाई नही करती तो हम देवश्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराएंगे।

क्या जरूरी है यौन अपराध के लिए स्किन का स्किन से टच होना
इस मामले में देवश्री ने बताया कि जिस तरह से जज ने नाबालिग लड़कियों का यौन उत्पीड़न करने वाले आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया, उससे वह बहुत खफा थीं। कंडोम जज की स्किन-टू-स्किन फैसले का एक प्रतीक है, जहां उन्होंने 12 साल की लड़की के स्तनों को बिना उसके कपड़ों को हटाए छूने के आरोप में आरोपी को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि स्किन के संपर्क में नहीं होने के कारण आरोपी का कृत्य यौन उत्पीड़न के दायरे में नहीं आता है। मैंने इस फैसले को विचित्र पाया और लड़की और उसके परिवार के दर्द को समझ सकती हूं।

ताज्जुब, किसी ने नही उठाई फैसले के खिलाफ आवाज
देवश्री ने कहा कि लह POCSO अधिनियम के तहत गनेदीवाला के खिलाफ अभियान शुरू करेंगी। उन्होंने कहा, ‘मैं इंतजार कर रही थी कि हमारे राजनीतिक नेताओं में से कोई इसे खिलाफ आवाज उठाएगा, लेकिन हैरानी की बात है कि कोई भी पीड़ितों का समर्थन करने के लिए आगे नहीं आया। इसलिए मैं उन्हें चुनौती देती हूं कि वह मेरे सवालों का जवाब दें। मुझे अवमानना का डर नहीं है, क्योंकि मुझे भी कानून पता है और विरोध करने का हर किसी को अधिकार है।

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