– माता-पिता समेत 7 लोगों की हत्यारन ने फिर मांगी जिंदगी की भीख

रामपुर, डीडीसी। आजाद भारत के इतिहास में पहली बार किसी महिला को फांसी की सजा सुनाई गई और हत्यारन शबनम सुर्खियों में आ गई। माता-पिता और मासूम भतीजे समेत 7 लोगों को मौत की नींद सुलाने वाली शबनम जिंदगी की भीख मांग रही है। राष्ट्रपति एक बार पहले ही शबनम की दया याचिका को खारिज कर चुके हैं, लेकिन 7 लोगों को मौत देने वाली शबनम अब अपनी मौत से खौफजदा है। उसने एक बार फिर दया याचिका दायर की है। इस याचिका से शबनम की मौत कुछ वक्त के लिए टल जरूर सकती है, लेकिन फांसी से बच नही सकती।

अमरोहा जिला जज की अदालत में रिसीव हुई याचिका
शबनम के मुकदमे की पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के दो अधिवक्ताओं ने गुरुवार को रामपुर जेल पहुंच कर दोबारा दया याचिका दायर करने के लिए आवश्यक प्रपत्र तैयार करके जेल प्रशासन को सौंप दिए गए थे। जेल प्रशासन ने शबनम की दया याचिका को लखनऊ में प्रमुख सचिव न्याय और अमरोहा जिला जज की अदालत में रिसीव करा दिया है। प्रमुख सचिव न्याय के यहां से दया याचिका राज्यपाल को भेजी जाएगी, जहां से राष्ट्रपति को जाना है। पीडी सलौनिया, जेल अधीक्षक रामपुर ने बताया कि शबनम के अधिवक्ताओं ने दोबारा दया याचिका तैयार की है। अधिवक्ता गुरुवार को जेल आए थे और शबनम के हस्ताक्षर करा कर दे गए थे। इसे शुक्रवार को प्रमुख सचिव न्याय और अमरोहा जिला जज की अदालत में रिसीव करा दिया गया है।

14 अप्रैल 2008 को किया था 7 लोगों का कत्ल
माता-पिता और मासूम भतीजे समेत सात लोगों के भरे-पूरे परिवार को मौत के घाट उतारने वाली घटना उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद के वाबनखेड़ी गांव की है। गांव में 14 अप्रैल 2008 को शबनम ने ही प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने परिवार को मौत के घाट उतार दिया था। इस जघन्य अपराध के लिए प्राइमरी शिक्षक शौकत अली की शिक्षा मित्र बेटी शबनम और उसके प्रेमी सलीम को को फांसी की सजा हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट से पुर्नविचार याचिका के साथ ही राष्ट्रपति ने शबनम की दया याचिका को भी खारिज कर दिया है।

अभी नही जारी हुआ डेथ वारंट, फांसी घर मे तैयारी
कोर्ट ने अभी शबनम का डेथ वारंट जारी नहीं किया हैं। वहीं दूसरी ओर रामपुर जिला कारागार में बंद शबनम को मथुरा जेल में बने महिला फांसी घर में फांसी पर लटकाने की तैयारी की जा रही है। आपको बता दें कि भारत की आजादी के बाद से आज तक इतिहास में ऐसा कभी नही हुआ कि किसी महिला को फांसी दी गई हो या फांसी की सजा सुनाई गई हो। ये इतिहास में पहली बार है कि किसी महिला को फांसी की सजा सुनाई गई है। इकलौता महिला फांसी घर मथुरा जेल में है और आजादी के बाद पहली बार इस फांसी घर को किसी महिला के लिए तैयार किया जा रहा है।

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