– अंधविश्वास के खेल में जुटा था पूरा का पूरा परिवार

चित्तौड़गढ़, डीडीसी। एक परिवार की जिद और अंधविश्वास ने शनिवार को बेटी की बली ले ली। परिवार 18 घंटे तक कमरा बंद कर टोना-टोटका करता रहा। युवती को घेरकर बैठा रहा। चीखने-चिल्लाने और अजीब सी आवाजों के बीच तंत्र-मंत्र चलता रहा। जमीन पर पड़ी युवती कब मौत के मुंह में चली गई, किसी को पता तक नहीं चला।

पुलिस को दिखाया टोना-टोटके का भय
युवती की मौत के बाद जब पड़ोसियों ने पुलिस को बुलाया तो परिवार, पड़ोसी और पुलिस के बीच भी कई घंटे तक ड्रामा चलता रहा। पुलिस को भी टोना-टोटका का भय दिखाया गया। अंतत: पुलिस युवती को अस्पताल ले गई, लेकिन वह तो पहले ही मर चुकी थी।

बहन में आ रही थी मरे पिता की आत्मा
यह टोना-टोटका किसी और ने नहीं, बल्कि परिवार की ही महज 12वीं में पढ़ने वाली इसी युवती की छोटी बहन ने किया। 5 बहनों में सबसे छोटी है। पिता की कुछ समय पूर्व मौत हो चुकी है। परिवार मानता है कि 12वीं में पढ़ने वाली बहन में उनके पिता की आत्मा आती है और वही आत्मा परिवार पर आने वाली विपत्ति और बीमारियों को दूर करती है। बस इसी अंधविश्वास से बीमार पड़ी 30 साल की बड़ी बहन का बंद कमरे में टोना-टोटका कर इलाज का प्रयास किया जा रहा था।

बंद कमरे में एक दूसरे को पीट रहा था परिवार
बाहर आ रही आवाजों से इस बात का अंदाजा भी लगाया जा रहा है कि परिवार के ये सदस्य एक-दूसरे के साथ मारपीट भी कर रहे थे। यही कारण था कि जिस युवती की मौत हुई है, उसके चेहरे सहित परिवार के अन्य सदस्यों को गहरी चोट के निशान भी मौजूद थे। ऐसे में मौत के कारण पर अब पुलिस नए सिरे से जांच करेगी।

मायके आकर बीमार हो गई मृतका
रावतभाटा की चर्च बस्ती की गीताबाई की 5 बेटियां हैं। उसके पति मोहनलाल का निधन हो चुका है। गीताबाई की 30 वर्षीय बेटी सुनीता पत्नी राजेश भाट निवासी भीम ब्यावर घर पर आई हुई थी। इसी दौरान उसकी तबीयत खराब हुई तो परिवारजनों ने इलाज कराने के बजाए टोने, टोटके का सहारा लिया।

18 घंटे तक घर मे चला टोना-टोटका
18 घंटे तक घर में टोने, टोटके की झूठी कहानियां चलती रहीं। इस दौरान महिला की तबीयत अधिक खराब हुई तो पुलिस को बुलाया गया। पुलिस की मौजूदगी में पार्षद संजय रेठूदिया पडौसियों की मदद से अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उसे मृत घोषित कर दिया। इस नाटकीय घटनाक्रम के दौरानमें 6-8 या इससे भी अधिक छोटे-छोटे बच्चे, 4 महिलाएं और दो पुरुष भी कमरे में बंद थे। पुलिस पहुंची तो सिर्फ दो छोटे-छोटे कमरों से 20 से 25 सदस्य बाहर निकले।

पुलिस-पब्लिक और परिवार के बीच चला ड्रामा
बंद कमरे में 18 घंटे के घटनाक्रम के बीच कई बार पड़ोसियों ने भी वहां जाने की कोशिश की। जो गया भी तो उसे भी आत्मा और टोटके की बातों में उलझा दिया गया। पुलिस को भी आत्मा की आवाज सुनाने की कोशिश की गई। कई घंटे तक परिवार, पुलिस और पड़ोसियों के बीच चले ड्रामे में पुलिस को बमुश्किल सफलता हाथ लगी, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। युवती को अस्पताल ले जाया गया, पर वह बची नहीं।

परिवार को देख पुलिस ने बुलाई मेडिकल टीम
महिला की मौत के बाद यह बाद सामने आई कि परिवार में ओर भी लोग भी कमरे में हैं। परिवार के जिस व्यक्ति की पूर्व में मौत हो चुकी थी, उसकी पत्नी गीताबाई, उसकी 5 बेटियों में से तीन किरण, अनिता व रज्जू, बेटा दिलीप भी यहां कमरे में थे। एक बेटी सुनीता थी, जिसकी मौत हुई। सुनीता के दो बच्चे दो बच्चे सहित अन्य बेटियों के बच्चे भी कमरे में थे।

DSP से बोली, आती थी पिता की आत्मा
DSP झाबरमल यादव ने महिला गीताबाई से बात की। गीताबाई का कहना था कि मेरी बहन की बेटी ने कुछ कर दिया। जिस कारण हमारे घर स्थिति बिगड़ गई। लड़की रज्जू का कहना है कि मेरे पिता की आत्मा मेरे अंदर आती है। DSP ने बताया कि महिला को मारा गया है या इसकी बीमारी से मौत हुई है, यह जांच की जाएगी। प्रारंभिक रूप से अंधविश्वास के बीच मौत होना माना जा रहा है।

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